छाता। कृषि विभाग के बीज गोदाम पर कार्यरत रितु अपने पैतृक घर पर रहने की जिद कर रहा था। रश्मि विरोध कर रही थी। दोनों के बीच यही विवाद था। रितु अपनी जिद छोड़ देता या रश्मि उसका साथ दे देती तो तीन बच्चे अनाथ नहीं होते। रितु और रश्मि का छाता-बरसाना रेलवे फाटक के समीप स्थित शमशान घाट पर एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।
रितु की शादी 2007 में दुर्गापुरी सौंख रोड निवासी कैलाश चंद्र वरुण की बेटी रश्मि के साथ हुई थी। रश्मि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हो गई थी। रितु कृषि विभाग में संविदा कर्मी था। आस पड़ोस में रहने वालों की मानें तो इन दोनों का पैतृक मकान और था।
रितु उस मकान में चलने के लिए रश्मि पर दबाव बना रहा था। रश्मि वहां जाने से इंकार करती थी। दोनों के बीच इस बात को लेकर विवाद होता रहता था। माना जा रहा है कि रविवार की रात को भी झगड़े की वजह यही रही होगी।
रश्मि के मायके वालों को शायद इसकी भनक थी तभी अंतिम संस्कार से पहले रितु के परिवार वालों से उत्पीड़न को लेकर विवाद हो गया। रश्मि के परिवार वालों का कहना था कि उनकी बेटी का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था। वह परेशान रहा करती थी। विवाद बढ़ने पर पड़ोस के लोगों ने बीच में पड़कर मामला शांत कराया। पुलिस भी यहां पहुंच गई थी।
कौन पालेगा इन बच्चों को
छाता। रश्मि और रितु के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी उर्वशी (7) बेटा नमन (5) और छोटी बेटी भूमि (2) साल की है। इनके दादा बुद्धिराम कौन पालेगा इन मासूमों को, कौन संभालेगा इन बच्चों को। बार बार यह कहकर बिलख पड़ते थे।