मथुरा। भीषण गर्मी में बच्चों के लिए स्कूल से घर तक की डगर बेहद कठिन हो गई है। स्कूली वाहनों में बच्चों को ठूसकर भरा जा रहा है। स्थिति इस कदर खराब है कि तीन की सवारी वाले आटो में 10-12 बच्चों को भरा जा रहा है। बसों में तो लकड़ी की बेंच डाल दी गई हैं।
शिक्षा को व्यवसाय बना चुके निजी क्षेत्र के विद्यालय प्रबंधक अतिरिक्त कमाई के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। घर से स्कूल तक बच्चों के आवागमन के लिए संचालित किए जा रहे वाहनों को भी उन्होंने नहीं छोड़ा है। इसका आंकलन शहर के नामचीन विद्यालयों की स्कूल बसों को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।
15 सीटर बस में 30 और 30 सीटर बस में 50 से 60 बच्चों को ठूसकर भरा जा रहा है। लक्ष्मीनगर से जनरलगंज आई स्कूल की मिनी बस को देखा तो उसमें सीटों के बीच खाली स्थान में बेंच पड़ी हुई थी। सदर बाजार क्षेत्र से निकल रही स्कूल बस के ड्राइवर ने बोनट पर बच्चों को बिठा रखा था।
आटो में भरे बच्चों का तो और भी ज्यादा हाल खराब था। तीन सीटर आटो में 12 की मौजूदगी बच्चों की बुरी हालत को दर्शा रही थी। इससे भी ज्यादा खराब हाल डैंपियर नगर में एक स्कूल की टाटा मैजिक में देखने को मिला। गर्मी से अकुला रहे 22 बच्चे एक-दूसरे के ऊपर ठूसकर भरे हुए थे। चेहरे मुरझा रहे थे। अधिकांश स्कूलों की बसों में आवश्यक सुविधाएं भी नहीं हैं।
800 से 1500 रुपये तक वाहन फीस
शहर के नामचीन विद्यालयों द्वारा स्कूल वाहन की मोटी फीस वसूली जा रही है। कहीं 800 रुपये प्रति छात्र है तो कोई 1500 रुपये तक वाहन फीस वसूल रहे हैं। कई विद्यालयों के अभिभावकों ने इसे लेकर आक्रोश भी जाहिर किया है। आटो चालक भी 600 से 1000 रुपये प्रति छात्र वसूल रहे हैं।
वाहनों की फिटनेस और चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं
जनपद में संचालित अधिकांश स्कूली वाहनों के चालकों के स्वास्थ्य परीक्षण पर कई बार सवाल उठे हैं। इनकी फिटनेस भी संदेश के घेरे में रही है। हादसे के बाद ही अधिकारियों को इनकी जांच की याद आती है।
स्कूली वाहनों की चेकिंग कराई जाएगी। जहां भी मानकों का पालन नहीं हो रहा होगा वहां विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वाहनों के लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे। चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी होगा।
मनोज मिश्रा, एआरटीओ प्रवर्तन।