मथुरा। एक बूढ़ा पिता अपनी बेटी के शव को ढोता रहा। पहले अस्पताल के वार्ड से बाहर तक लाया और फिर स्ट्रेचर पर रखकर एंबुलेंस में रखा। अस्पताल के किसी स्टाफ ने शव को हाथ तक नहीं लगाया। इतना ही नहीं रिश्तेदारों से पैसा लेकर प्राइवेट एंबुलेंस की व्यवस्था की तब कहीं शव लेकर घर पहुंचा।
गांव सुनामई, अलीगढ़ निवासी 21 वर्षीय डाली टाउनशिप स्थित कांशीराम कालोनी में बड़ी बहन नीतू के यहां रहकर जिला अस्पताल में टीबी का इलाज करा रही थी। रविवार को उसे अचानक दस्त हुए तो सोमवार सुबह दस बजे उसके पिता महावीर उसे जिला अस्पताल ले आए। ड्यूटी पर डॉ. राजेंद्र सिंह तैनात थे। पहले डॉली को इंजेक्शन दिया गया, बाद में हालत बिगड़ी तो आक्सीजन भी लगाई गई लेकिन डॉली ने दम तोड़ दिया।
महावीर ने बताया कि घर ले जाते समय स्टाफ ने मृतका को हाथ तक लगाने से मना कर दिया। न ही उन्हें शव वाहन मुहैया कराया। हारकर 500 रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस बुलाई गई।
शव वाहन पर ड्राइवर की तैनाती नहीं हो सकी है। इस कारण समस्या बन रही है। हालांकि उनके पास यदि कोई पीड़ित आता तो किसी अन्य ड्राइवर को भेजकर शव उसके घर पहुंचवा दिया जाता।
- सीएमएस, डॉ. वीके गुप्ता