ड्रग्स पर भारी पड़ी कान्हा की भक्ति
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एटा। नशा एवं दुर्व्यसनों के शिकार रूस के बहुत से परिवारों के लिए हरे राधे-हरे कृष्णा का नाम वरदान बन रहा है। वृंदावन की रूप सनातन संस्था के महंत श्रीधर महाराज के आह्वान पर हरे कृष्णा-हरे राम सत्संग से जुड़े यह युवक नशा एवं अन्य दुर्व्यसन ही नहीं छोड़ चुके हैं वरन वे हिंदू धर्म अपनाकर वृंदावन में ही रम गए हैं।
इन दिनों शहर में आयोजित हो रही कथा में आए पांच रसियन युवक-युवतियां शहर के श्रद्धालुओं का आकर्षण बने हुए हैं। 28 वर्षीय मुस्लिम युवक रेनेथ ने बताया कि गलत संगति के चलते वह 11 वर्ष की आयु से ही ड्रग व नशे का आदी हो गया था। इसके चलते उसकी पढ़ाई ही बाधित नहीं हुई वरन उसका जीवन भी खतरे में आ गया। इसी दौरान 2012 में वृंदावन से पहुंचे श्रीधर महाराज के सत्संग में उसकी मां लेकर गई। जहां गुरु जी ने उसे हरे राम-हरे कृष्ण कहने को कहा। गुरु जी के प्रवचन उनसे रूसी दुभाषिये के माध्यम से बताई गईं। गुरुजी के कहने पर परिक्रमा करने वृंदावन आए रेनेथ इस कदर प्रभावित हुआ कि वह वृंदावन में ही रम गया। हिंदु धर्म अपना चुके रेनेथ अब राधा रमन है। आज वह ड्रग, मांस मदिरा तो दूर प्याज, लहसुन व चाय भी छोड़ चुका है।
ईसाई परिवार के सरगेव एवं माइकस का भी कहना ऐसा ही है। इन दिनों वृंदावन में पूजा पाठ में व्यस्त रहने वाले सरगेव सुंदर गोपाल दास एवं युवा वैज्ञानिक माइकस मधु मंगल बन चुके हैं।
आज के मधु मंगल एवं चार वर्ष पूर्व के माइकस अमेरिका में प्रोजेक्ट मैनेजर थे। इसी दौरान वे नशे एवं गंदी आदतों की चपेट में आ गए। बीमार होकर रूस लौटे माइकस का जीवन खतरे में आ गया लेकिन हर राम हरे कृष्ण सत्संग में आने के बाद उनकी आदतों में ही जीवन शैली भी बदल गई।
दो रसियन युवतियां विक्टोरियन एवं कात्येन भी कान्हा के रंग में रंगकर वृंदा एवं इंदुमती बन चुकी हैं। हाथ में जाप की माला लिए यह लोग हर समय हरे राम हरे कृष्ण का जाप करते दिखेंगे। इतना ही नहीं यह लोग अभिवादन में भी राधे राधे ही बोलते हैं। मांसाहार करने वाले सभी युवक इन दिनों शाकाहारी बन चुके हैं।
हिंदू रीति रिवाज से की शादी
वृंदावन में मिले कात्येन (इंदुमती)एवं वैज्ञानिक माइकस (मधु मंगल) ने गत वर्ष रूस स्थित मंदिर में यज्ञ में आहुतियां देकर हिंदू रीति रिवाज से शादी के फेरे लिए हैं।