मैनपुरी। ग्राम पंचायत समितियों के निष्क्रिय होने से ग्राम पंचायतों में विकास की रफ्तार थम गई है। ग्राम पंचायत समितियों की बैठकें नहीं होने से गांवों के विकास की कार्य योजना तक तैयार नहीं हो पा रही है। समितियों के सदस्य भी बैठकें नहीं होने से अपने अधिकारों का प्रयोग करने तथा गांव का विकास कराने से वंचित हो रहे हैं।
ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए गठित ग्राम पंचायतों में गांव के विकास के लिए ग्राम पंचायत समितियों का गठन किया गया है। अधिकांश समितियों में ग्राम प्रधान ही अध्यक्ष होता है। कुछ समितियों में ग्राम पंचायत द्वारा नामित ग्राम पंचायत सदस्य को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है। ग्राम पंचायत समितियां ही गांव के विकास की कार्य योजना बनाती हैं। समितियों की बैठक में पारित प्रस्ताव से ही गांव के विकास के लिए वरीयता के आधार पर काम कराए जाते हैं।
जिले की ग्राम सभाओं में गठित ग्राम पंचायत समितियां पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी हैं। ग्राम प्रधान इन समितियों की बैठक तक नहीं बुलाते हैं। जिससे ग्राम पंचायत सदस्यों में असंतोष भी है। ग्राम पंचायत सदस्य प्रदीप यादव, मनोज कुमार यादव, ब्रजनंदन सिंह यादव, राजवीर उर्फ राजू वाल्मीकि, राजेंद्र सिंह, बलवीर सिंह, मीनादेवी, सुशीला देवी कहती हैं प्रधानों की मनमानी से पंचायत समितियां अपना अस्तित्व ही खोती जा रही हैं। जिससे पंचायती राज व्यवस्था का महत्व कम होता जा रहा है।