फिरोजाबाद। पूर्व विधायक रामवीर यादव की सपा सरकार में तूती बोलती थी। जिले के तत्कालीन एसपी अमिताभ ठाकुर के ऊपर उन्होंने हाथ तक छोड़ने तक का आरोप उनके ऊपर लगा। रामवीर विधायक अपनी छवि को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के काफी करीब होने के कारण सपा में जब अखिलेश यादव का राज आया तो उनका कद पार्टी में काफी कम हो गया। मंगलवार को दस साल पुराने मामले में रामवीर यादव के जेल जाने से उनके समर्थकों में मायूसी छा गई है। इंतजार सुनवाई की अगली तारीख चार जनवरी का किया जा रहा है।
जसराना विधानसभा से रामवीर यादव चार बार विधायक चुने गए। चारों बार वह समाजवादी पार्टी से जीते थे। सूबे में जब-जब सपा की सरकार रही उनकी तूती बोलती रही। जिले से लेकर लखनऊ सचिवालयों तक में अपनी धमक के लिए रामवीर जाने जाते रहे हैं। वर्ष 2006 में यहां अमिताभ ठाकुर पुलिस अधीक्षक के पद पर थे। 28 जुलाई 2006 में एका क्षेत्र में रामवीर यादव का विवाद अमिताभ ठाकुर से हो गया था। सत्ता की हनक में रामवीर यादव ने अमिताभ ठाकुर के साथ अभद्रता कर दी थी।
तब आरोप लगा था कि रामवीर यादव ने ठाकुर पर हाथ छोड़ दिया है। मामला काफी तूल पकड़ा था। अमिताभ ठाकुर ने रामवीर यादव यादव के खिलाफ एका थाने में मामला दर्ज कराया था। तब सपा की ही सरकार थी। बाद में अमिताभ ठाकुर को हटा दिया गया था। 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में यह चुनावी मुद्दा बन गया था और लगातार तीन बार जीतने वाले रामवीर यादव निर्दलीय रामप्रकाश यादव से हार गए थे।
अमिताभ ठाकुर पर हाथ छोड़ने की घटना को सभी दलों ने जिले में चुनावी मुद्दा बना लिया था इसकी कीमत सपा को 2007 के चुनाव में सीटें गंवा कर चुकानी पडी थी। उस समय मुलायम सिंह यादव ही पार्टी के मुखिया थे और शिवपाल यादव सबसे ताकतवर मंत्री। इन दोनों से करीबी और रिश्तेदारी के चलते रामवीर यादव जिले में सत्ता की धुरी बने हुए थे।
सपा में जब अखिलेश यादव का राज शुरू हुआ तो जिले की राजनीति में रामवीर यादव का कद कम हो गया। लोकसभा चुनाव में यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद बने तो रामगोपाल यादव का सीधा दखल जिले में हो गया। चूंकि रामवीर शिवपाल ग्रुप के करीब थे लिहाजा प्रोफेसर रामगोपाल यादव के दरबार में रामवीर यादव की सपा की सरकार होते भी चल नहीं पा रही थी।
यहां तक कि जब विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काट कर शिवप्रताप यादव को दिया गया तो रामवीर यादव ने सीधा हमला प्रोफेसर रामगोपाल यादव और सांसद अक्षय यादव पर बोला। दोनों पर गंभीर आरोप लगाए थे। रामवीर यादव 2017 का विधानसभा चुनाव सपा से बगावत कर लडे और खुद न जीत कर सपा को जसराना से हरा कर अपनी अनदेखी का बदला लेने में कामयाब हो गए।
जिले में सपा में रहते हुए पार्टी से ही एक विधायक से उनकी हमेशा ठनी रही इस कारण भी वह सुर्खियों में रहे हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में खुल कर भाजपा के साथ आने पर भी रामवीर सुर्खियों में रहे।
तत्कालीन एसएसपी अमिताभ ठाकुर ने पूर्व विधायक रामवीर यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया और उसमें चार्जशीट भी लगी थी। तत्कालीन एसएसपी अमिताभ ठाकुर ने कहा भी था कि उनके द्वारा मजबूत पैरवी करने के बाद भी कोर्ट में गवाहों के मुकरने से रामवीर यादव बच गए थे।