एटा। तीन तलाक को लेकर एक बार फिर मुस्लिम समाज की महिलाएं खुश नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानून लाने जा रही केंद्र सरकार की प्रावधानों पर महिलाओं ने खुशी जताई। वहीं मुस्लिम धर्मगुरु कानून को शरीयत में दखल देने वाला बता रहे हैं।
विगत 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन तलाक को लेकर कानून बनाने के निर्देश दिए थे। केंद्र सरकार शीत सत्र में कानून लाने जा रही है। इसमें तीन तलाक लेने वाले पति को तीन साल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। इसके साथ ही इसे संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाया जा रहा है। कानून बनने के बाद फेसबुक, व्हाट्सएप पर लिखकर अथवा बोलकर तलाक देना भी गैर कानूनन माना जाएगा।
तलाक के कानून को लेकर मुस्लिम महिलाओं में खासी खुशी है। महिलाओं ने कानून को महिला सशक्तीकरण का जरिया मानते हुए स्वागत किया। महिलाआें का कहना है कि कानून बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा। साथ ही उनको जीने का अधिकार मिलेगा।
तीन तलाक पर कानून बनने से जो महिलाएं परेशान हैं अथवा जिनका अहित हुआ है, उनको न्याय मिल सकेगा।
शबनम
सरकार ने शरीयत का ख्याल करते हुए कानून बनाया है। इससे महिलाओं को जीने का अधिकार मिलेगा।
शगुफ्ता आलम
तीन तलाक पर कानून बनने से महिलाओं को न्याय मिलेगा। एक बार में तीन तलाक देना अपराध होगा।
सलमा बेगम
तीन तलाक को लेकर बनने जा रहा कानून स्वागत योग्य है। इस कानून से समाज की महिलाआें को इंसाफ मिलेगा।
शाइस्ता बेगम
संविधान को ध्यान में रखकर कानून बनाया जाए। सरकार शरीयत में दखल कर रही है। शरीयत के हिसाब से ही कानून बनाया जाए।
मौलाना सिबतेन हैदर, दरगाह शरीफ, मारहरा