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महिला जिला अस्पताल में तीन महीने में दो ऑपरेशन

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फिरोजाबाद। मातृ एवं शिशु मृत्युदर कम करने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। गर्भकाल से लेकर प्रसव के बाद तक मातृ एवं शिशु की देखभाल के लिए वंदना योजना शुरु हुई है। मगर जिला महिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी के अभाव में इन दिनों रैफर सेंटर बना हुआ है। आलम यह हे कि जिला अस्पताल में तीन माह में सिर्फ दो गर्भवती महिलाओं के प्रसव हुए हैं। बाकि गर्भवतियों को प्रसव के समय प्राइवेट नर्सिंग होम में रैफर कर दिया जाता है।
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इन दिनों जिला अस्पताल में एक ही प्रसूती रोग विशेषज्ञ हैं। एनस्थिमिया (बेहोशी) विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने पर जिला अस्पताल से बुलाया जाता है। यानि 24 घंटे आपरेशन की सुविधा मिलने के बजाय एक घंटे छोड़कर अगले दिन मिलती है। अगर इनमें से कोई एक चिकित्सक अवकाश पर हो तो प्रसूता की जान असुरक्षित रहती है।

सीएचसी एवं पीएचसी पर प्रसव काल के समय गर्भवती महिला की स्थिति बिगड़ती है तो जिला महिला अस्पताल में रैफर किया जाता है। मगर यहां प्रसूता को इलाज मिलने के बजाय आगरा या फिर प्राइवेट नर्सिंग होम में रैफर कर दिया जाता है। यही कारण है अगस्त, सितंबर, अक्तूबर एवं नवंबर माह में अब तक सिर्फ दो ही आपरेशन से महिलाओं के प्रसव हुए हैं। सीएचसी एवं पीएचसी की तरह नार्मल डिलेवरी की व्यवस्था है।
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