मैनपुरी। नाग पंचमी का त्योहार जिले भर में श्रद्धाभाव से मनाया गया। घर-घर में नाग देवता को दूध पिलाया गया। महिलाओं ने दीवारों पर नाग बनाकर पूजा-अर्चना की और घरों में पकवान बनाए गए। सुबह से शाम तक सपेरे नाग का पिटारा लिए घूमते नजर आए।
नाग पंचमी होने के कारण ही सुबह से गली-मोहल्लों में बीन की आवाज सुनाई दे रही थीं। जिसे सुनकर लोग घरों से बाहर निकलकर नाग देवता के दर्शन को आतुर दिखे। लोगों ने नाग देवता को दूध पिलाया और सपेरों को दक्षिणा देकर पुण्य लाभ कमाया। वहीं कुछ उत्साही युवक सांपों को छूकर आशीर्वाद लेने का प्रयास करते देखे गए।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों से मिट्टी खोदकर घर लाई गई, जिसमें भुजरियों की बुवाई करके त्योहार की रस्म अदायगी की। बुजुर्ग कैलाशो देवी ने बताया कि नाग पंचमी रक्षाबंधन पर्व का एक हिस्सा है, आज के दिन बोई गई भुजरिया रक्षाबंधन तक बड़ी हो जाती हैं। रक्षाबंधन वाले दिन इन्हें ले जाकर तालाब में सिरा दिया जाता है। बाद में आपस में इसका आदान-प्रदान करते हैं। जिसे आपस में भाईचारे को बढ़ावा मिलता है।
किशनी में लालो बंजारिन की मजार पर पूरे दिन नेजा और झंडे चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। मान्यता है कि सांप काटे व्यक्ति को यहां लाने से वो ठीक हो जाता है। वर्ष भर में जो लोग ठीक हुए वह परिवारीजनों के साथ आए और नाग पंचमी पर मजार पर झंडे और नेजे चढ़ाए। श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए मजार पर पहुंचे। देर शाम तक नेजे-झंडे चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। किशनी चौराहे पर शिव मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। यहां सांप काटे लोगों का झाड़फूंक कर उपचार होता है।
करहल और भोगांव में नाग पंचमी का त्योहार श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। महिलाओं ने घर के दरवाजों पर नागों के चित्र बनाकर उनका पूजन किया। सपेरों ने सांपों के दर्शन कराए। नाग देवता के प्रतीक के रूप में पेड़ों की जड़ों पर फूल एवं दूध चढ़ाकर पूजा की। बेवर, कुरावली, घिरोर आदि कस्बों और ग्रामीण अंचलों में भी नाग पंचमी परंपरागत तरीके से मनाई गई।