कासगंज। शुक्रवार को इस सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण की अवधि रात्रि में 3 घंटा 56 मिनट तक मानी जा रही है। ग्रहण को देखते हुए लोगों में सूतक विचार आदि को जानने की उत्सुकता देखी गई। इतना ही नहीं लोगों ने ग्रहण का राशि पर पड़ने वाले असर इसके उपाय आदि के बारे में भी जानकारी की। जिससे ग्रहण के दोष का निवारण किया जा सके।
गुरु पूर्णिमा के मौके पर चंद्र ग्रहण की जानकारी मिलते ही लोगों ने पुराहितों, पुजारियों आदि से संपर्क साधना आरंभ कर दिया। ताकि ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक आदि के आधार पर घर में भोजन, आदि की व्यवस्था कर ली जाएं। ग्रहण को ध्यान मे रखते हुए मंदिरों के पुजारियों आदि ने भी अपनी व्यवस्थाएं शुरू कर दी। मंदिरों पर कुस की व्यवस्था की गई। मंदिरों में ग्रहण के सबंध में जानकारी करने पहुंचने वाले लोग कुस लेकर आते भी दिखाई दिए, ताकि इसके अपने घरों में रखे सामान में डाला जा सके। जिन परिवारों में गर्भवती महिलाएं हैं वे भी तैयारियों में जुटे रहे। बाजार से गेरु आदि सामान की खरीदारी की गई। ताकि गर्भवती महिला के लेप किया जा सके।
दोपहर 11:30 बजे मंदिर के कपाट हो जाएंगे बंद
कासगंज। ग्रहण के चलते मंदिर के कपाट दोपहर 11: 30 बजे बंद हो जाएंगे। मंदिरों में होने वाली दोपहर, संध्या आदि के समय होने वाली आरती, पूजा इस समय तक पूरी कर ली जाएगी। भक्त भी इसके बाद न तो मंदिरों में ही पूजा हो सकेगी और न हीं घरों पर। दोपहर 12:41 बजे से सूतक लग जाएंगे।
ग्रहण का समय
ग्रहण का आरंभ-रात्रि 11:54 बजे
ग्रहण का मध्य -रात्रि 1:49 बजे
ग्रहण का समापन- रात्रि 3:50 बजे
ग्रहण का राशियों पर असर
मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन-शुभ
वृष, कर्क, कन्या, धनु-मध्यम
मिथुन, तुला, मकर, कुंभ-अशुभ
कब कर सकते हैं भोजन
कंठी लेने वाले व जनेऊ धारी दोपहर 12 बजे तक
वृद्ध, रोगी एवं बच्चे शाम 7:22 बजे तक भोजन कर सकते हैं
सामान्य जन के लिए दोपहर 12:41 बजे के बाद भोजन वर्जित रहेगा
गर्भवती महिलाएं क्या करें क्या न करें
ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची आदि धारदार हथियार का प्रयोग न करें
ग्रहण के दौरान कमरे से बाहर न निकलें
अपने ईष्ठदेव व कुल देव की पूजा करें
जिन राशियों पर राहु, केतू एवं शनि की दशा चला रही है या फिर जिन राशियों पर ग्रहण का अशुभ फल रहेगा वे छाया दान करे। छायादान में कांसे के बर्तन को देशी घी पिघलाकर भरने के बाद उसमेे चादी का तार सांप की आकृति बनाकर डाल दे। ग्रहण की मध्य अबधि के बाद पात्र में चांद का प्रतिबिंब दिखनेे पर अपनी छाया देखकर बर्तन को पीपल के पेड़ के नीचे ले जाकर रख दे। यदि पीपल पेड़ आसपास न हो तो घर के बाहर इस बर्तन को रख देना चाहिए।
ओमप्रकाश शर्मा पुजारी गोवर्धनाथ मंदिर