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अब बेसिक शिक्षा विभाग में नहीं होगा निलंबन का खेल

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फाइल फोटो
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एटा। बेसिक शिक्षा विभाग में आए दिन होने वाले निलंबन कार्रवाई पर अंकुश की तैयारी है। लापरवाह शिक्षकों को निलंबन से पूर्व नोटिस, स्पष्टीकरण एवं वेतनवृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी बीएसए ने कर्तव्यबोध के सहारे शिक्षकों से बेहतर एवं सकारात्मक सहयोग का संकल्प दोहराया है।

डायट प्राचार्य एवं प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कर्तव्य बोध के सहारे शिक्षकों से बेहतर सेवाओं एवं सहयोग की पहल की है। इतना ही नहीं अधिकारी ने निलंबन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के लंबित मामले तीन दिनों में निस्तारित करने के भी निर्देश दिए हैं। जिले में संचालित 1927 परिषदीय प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 5300 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं सेवारत हैं। बता दें कि विभाग में लेट होने, अनुपस्थित जैसी छोटी छोटी बातों पर निलंबन की कार्रवाई का चलन है। बहाली के नाम पर सुविधा शुल्क के आरोप लगते रहे हैं।
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यह है निलंबन का खेल?
प्राथमिक शिक्षा में निलंबन को दंड नहीं माना जाता है। कुछ लोग तो इसे कमाई का जरिया भी बताते हैं। वहीं कुछ का कहना है कि कार्रवाई के बाद शिक्षक और उदासीन हो जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कब कौन शिक्षक निलंबित और बहाल हो गया, पता ही नहीं चलता है। कार्रवाई की सर्विस बुक पर कोई एंट्री नहीं होती। वहीं निलंबित शिक्षक और निरंकुश हो जाते हैं।
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शिक्षकों के निलंबन से शैक्षणिक व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। शिक्षक उदासीन एवं अपमानित महसूस करते हैं। वहीं संदेश भी गलत जाता है। लापरवाही पर निलंबन के स्थान पर वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी। निलंबन के सभी लंबित मामले तीन दिन में निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-मनोज कुमार गिरि, डायट प्राचार्य एवं प्रभारी बीएसए
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