एटा। जिले में झोलाछापों का जोर बढ़ रहा है। गली-गली खुले अवैध नर्सिंग होम (इनका कोई रजेस्ट्रेशन नहीं) प्रसूताओं की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई में कमजोर पड़ रहा है। विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले के गैर प्राधिकृत निजी चिकित्सालयों में मई माह तक 3336 प्रसव हुए हैं। जबकि विभाग के अस्पतालों और केंद्रों में महज 2102 प्रसव हुए हैं। ऐसे में सरकार की जननी सुरक्षा योजना जिले में फेल नजर आ रही है।
दरअसल, प्रसूताओं को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सरकार ने जननी सुरक्षा योजना का प्रावधान किया है। योजना के तहत प्रसूताओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए 1400 रुपये का भुगतान किया जाता है। मई माह में जारी की गई स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में वर्ष 2018-19 में 34821 प्रसव होने हैं। जिसमें मई माह तक 5804 प्रसव हुए हैं। जिसमें 2102 प्रसव सरकारी चिकित्सालय में हुए हैं। जबकि 3336 प्रसव गैर प्राधिकृत निजी चिकित्सालयों मेें प्रसूताओं का उपचार हुआ है। रिपोर्ट देखकर साफ है कि जिले मे जननी सुरक्षा योजना हाशिए पर है। जबकि अवैध अलट्रार्साउं और नर्सिंग होम की जिले में बाढ़ आ रही है। स्वास्थ्य विभाग अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुस्त हैं।
2261 लाभाथियों को नहीं मिला भुगतान
सरकारी अस्पताल की दवा और उपचार से लोग आजिज आ चुके हैं। अभी तक पिछले साल के अवशेष 2261 लाभार्थियों को दूसरी किश्त नहीं मिल सकी है।
इनका कहना है
संस्थागत प्रसव कराने के निर्देश मिल गए हैं। इसका पूर्ण पालन कराया जाएगा। झोलछापों पर लगाम लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
डा. एके अग्रवाल, सीएमओ
कहतें हैं आंकड़े
34821 होने हैं संस्थगत प्रसव
5443 हो सके हैं प्रसव
3336 प्रसव हुए अवैध नर्सिंग होम में
16.5 फीसदी काम