एटा। हाईकोर्ट के फैसले ने जिले के लोगों में उम्मीद जगाई है कि अब सरकारी अस्पतालों की हालत में सुधार होगा। एक ओर जहां सरकारी कर्मचारी इस फैसले को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोग अस्पताल का हाल सुधारने की आस लगाए हुए हैं।
हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार को अस्पतालों की हालत सुधारने का भी आदेश जारी किया है। दरअसल, अधिकांश सरकारी कर्मचारी इलाज कराने के लिए प्राइवेट चिकित्सालयों का रूख करते हैं। कई बार चिकित्सा भत्ता लेने के लिए प्राइवेट डाक्टरों से फर्जी बिल बनवाकर लाभ लिया जाता है। कोर्ट के निर्देश के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। जिले में 17 हजार कर्मचारी भी अब जिला अस्पताल में इलाज कराएंगे।
इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को जिला अस्पतालों का हाल सुधारने के निर्देश दिए हैं। जिला अस्पताल में सबसे बड़ी परेशानी डाक्टरों की कमी है। इसके साथ ही तमाम चिकित्सा सुविधाओं के लिए मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। हालांकि जिला अस्पताल में पैथलौजी, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, टीबी समेत तमाम रोगों के इलाज की व्यवस्था है, मगर लोगों को अब इन व्यवस्थाओं में इजाफा होने की आस है। साथ ही डाक्टरों की संख्या में बढोतरी होने से अस्पताल का हाल सुधरेगा।
कैग और विजिलेंस से लगेगी खेल पर अंकुश
कोर्ट ने कैग से आडिट और हर जिले में विजिलेंस गठित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद जिला अस्पताल में हुए बीते वर्षों में हुए खेल में कई खुलासे हो सकते हैं। साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालेे डाक्टरों की मनमानी पर विजिलेंस लगाम लगाएगी।
फिर वीआईपी को भी लगना होगा लाइन में
कोर्ट ने आदेश दिया है कि वीआईपी को जिला अस्पताल में आम मरीज की तरह से ट्रीट किया जाए। इस निर्देश के बाद लोगों में खुशी है कि वीआईपी भी अब लाइन में लगकर इलाज कराएंगे। आम लोगों के इलाज के लिए उपेक्षा नहीं झेलनी होगी।
अभी तो है खराब हाल
मौजूदा दौर में जिला अस्पताल का हाल काफी खराब है। अस्पताल में 27 पदों के सापेक्ष महज 15 डाक्टर हैं। साथ ही बड़े रोगों के इलाज की कोई सुविधा नहीं है। वहीं जिला अस्पताल में मशीनें तो तमाम हैं, लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी है।
डायलसिस यूनिट देगी राहत
जिला अस्पताल में इन दिनों डायलसिस यूनिट का काम तेजी से चल रहा है। शासन ने 12 लाख रुपये की दूसरी किश्त जारी होने के बाद काम में तेजी आ गई है।
मगर अस्पताल पर बढ़ जाएगा बोझ
हाईकोर्ट के निर्देश पर अमल होने के साथ ही जिला अस्पताल पर बोझ बढ़ेगा। अभी तक जहां इलाज के लिए ओपीडी में 1500 तक पंजीकरण होते हैं। निर्देश के बाद इसमें इजाफा होने की उम्मीद है। इसके लिए व्यवस्थाओं में बढ़ोतरी आवश्यक है।
कहते हैं आंकड़े
27 पद हैं जिला अस्पताल में डाक्टरों के
15 डाक्टर कर रहे हैं काम
1500 मरीज पहुंचते हैं ओपीडी में
17 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं जिले में