मैनपुरी। जिले के सरकारी जिला अस्पताल सहित एक भी प्राइवेट नर्सिंगहोम और मैटरनिटी होम में दमकल विभाग की एनओसी नहीं है। ऐसे में यदि वहां आग लग जाए तो मरीजों की जान रामभरोसे ही है। साथ ही यहां भी लखनऊ के केजीएम जैसा हादसा हो सकता है। दमकल विभाग भी मानक पूरे न होने के चलते एनओसी देने से मना कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग में भी लाइसेंस के नवीनीकरण से पूर्व एनओसी मांगते हैं। सीएफओ का कहना है कि मानक पूरे न होने पर एनओसी तो नहीं दी जा सकती। उन्हें सीज फायर इंस्ट्रमेंट लगवाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
जिले में सरकारी जिला अस्पताल सहित 124 से अधिक प्राइवेट नर्सिंगहोम और मैटरनिटी होम हैं। इनमें से अधिकांश के पास आग से निपटने के लिए उपाय नहीं हैं। नियमानुसार अस्पताल और मैटरनिटी होम में अग्निशमन विभाग से एनओसी लेनी चाहिए। यदि कहीं अग्निकांड होता है तो सुरक्षा रामभरोसे ही है। स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंगहोम का लाइसेंस नवीनीकरण से पूर्व दमकल विभाग से एनओसी लेने का नियम है, लेकिन मानकों की अनदेखी के कारण दमकल विभाग एनओसी नहीं दे रहा है।
जिले के जिला अस्पताल सहित अधिकांश नर्सिंगहोम और मैटरनिटी होम दमकल विभाग की बिना एनओसी के ही चल रहे है। इस ओर न तो स्वास्थ्य विभाग की नजर है और न ही दमकल विभाग की।
ये हैं मानक
- प्रत्येक नर्सिंग अस्पताल में आपात स्थिति में निकास की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
- प्रत्येक अस्पताल में आसानी से पहुंचने का रास्ता होना चाहिए।
- स्लैब मानक के अनुसार चौड़ी होनी चाहिए।
- भवन निर्माण की स्वीकृति अधिकृत संस्था द्वारा होनी चाहिए।
-अग्निशमन यंत्र लगे हेाने चाहिए। साथ ही सभी व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
- लगे अग्निशमन यंत्रों का स्टाफ को प्रयोग करना आना चाहिए।
सीज फायर लगा की इतिश्री
जिला अस्पताल में हर समय काफी भीड़ रहती है। इसके बाद भी जिला अस्पताल के लिए एनओसी तक नहीं ली गई है। नहीं आग से सुरक्षा के लिए मानक के अनुसार उपाय ही किए गए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन ने कमरों में मात्र सीज फायर लगाकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। वहीं बर्न वार्ड के नाम पर मात्र आठ पलंगों का एक कमरा है। उसमें भी सुरक्षा के नाम पर आम लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां पर बिजली के तार खुले पड़े हैं। वहीं अग्निशमन सुरक्षा के नाम पर मात्र एक सीज फायर लगा हुआ है।
सीएफओ मनू शर्मा का कहना है कि जिला अस्पताल एवं अन्य किसी भी नर्सिंगहोम और मैटरनिटी होम के पास विभाग की एनओसी नहीं है। इस संबंध में सीएमओ से बात कर जिला अस्पताल और अन्य अस्पतालों को एनओसी लेने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
सीएमओ डॉ. शरद वर्मा का कहना है कि जो नर्सिंगहोम और मैटरनिटी होम मानकों को पूरा करते हैं उन्हें एनओसी लेने के लिए लिखा जाएगा। जिले में अधिकांश नर्सिंगहोम या मैटरनिटी होम काफी छोटे हैं। ऐसे में नियमानुसार जो भी होगा इसके लिए उन्हें लिखा जाएगा। वहीं जिला अस्पताल में सीएमएस से बात कर आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।