किसानों को लाभ देने वाली योजनाओं को पारदर्शी और भेदभाव रहित बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने एक ऐसा पोर्टल विकसित किया है, जो आवेदन करने पर किसान का वरीयता क्रम तय करेगा। इसी के आधार पर उसे योजना का लाभ मिलेगा। इस पारदर्शी व्यवस्था के बाद विभाग के अधिकारी योजना के लिए पात्र किसानों के चयन में हेराफेरी नहीं कर पाएंगे।
खेती-किसानी में आने वाले आर्थिक संकट से किसानों को उबारने के उद्देश्य से प्रदेश और केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही हैं। खाद, बीज और कीटनाशक पर किसानों को अनुदान मिल रहा है। अब कृषि यंत्रों पर भी किसानों को अनुदान देने की व्यवस्था हो गई है।
इनमें कृषि विभाग और मंडी परिषद की कई योजनाएं ऐसी हैं जिन पर सरकार 90 प्रतिशत तक का अनुदान देती है। इन योजनाओं के लिए पात्र किसानों के चयन को लेकर अधिकारियों पर भेदभाव के आरोप भी लगते रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने अब पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी है। सरकार ने ऐसा पोर्टल बना दिया है जहां किसान जैसे ही किसी योजना का लाभ लेने के लिए खुद को पंजीकृत करेगा, सॉफ्टवेयर उस किसान का वरीयता क्रम तय कर देगा
अब योजना का लाभ लेने, चयन और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। लेकिन इसमें एक बदलाव किया गया है कि पहले आओ और पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। जो किसान पोर्टल पर योजना का लाभ लेने के लिए पहले आवेदन करेगा उसे पहले लाभ दिया जाएगा।
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बीज अनुदान योजना में हुआ बदलाव
कृषि उप निदेशक विजय शंकर यादव ने बताया अभी तक पंजीकृत किसानों को तीन साल में एक बार नया बीज सब्सिडी पर मिलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यानी यदि किसान के पास दो हेक्टेयर भूमि है और पिछले साल किसान ने एक हेक्टेयर भूमि के लिए बीज लिया और एक हेक्टेयर के नहीं लिया तो ऐसे किसान अगली साल बची भूमि के लिए नया बीज सब्सिडी पर ले पाएंगे।