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हर बार सिर्फ तारीख पर तारीख...नहीं मिलता न्या

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पीड़ित परिवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। दलितों को शीघ्र न्याय दिलाने की शासन और न्यायपालिका की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। अदालत में गवाही देने के लिए सालों से विवेचक ही नहीं आ रहे हैं। दलित उत्पीड़न के मामलों के गवाहों को अदालत में गवाही देने के लिए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा पा रही है। सालों से लंबित मुकदमों में पीड़ित अदालत से केवल तिथि लेकर ही लौट रहे हैं।
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दलितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए इलाहाबाद कोर्ट में एससीएसटी एक्ट गठित किया। इस अदालत में जिले भर के दलित उत्पीड़न के मुकदमों की सुनवाई की जाती है। अदालत के कड़े रुख के बाद भी विवेचक सहित पुलिस के गवाह समय से गवाही देने न्यायालय में नहीं आ रहे हैं। इन मामलों में अभियोजन के गवाहों को पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। आरोपियों के डर की वजह से गवाह अदालत में गवाही देने नहीं जा रहे हैं। पीड़ितों ने इसकी शिकायत भी की है। गवाही नहीं होने से पीड़ित अदालत से केवल तारीखें लेकर लौट रहे हैं।

केस एक: कोतवाल के बिना जमानती वारंट जारी
थाना कोतवाली के हिंदपुरम कालोनी निवासी विजय उर्फ छोटू की हत्या आठ अप्रैल 2014 को की थी। विजय के पिता ओमप्रकाश ने आजाद नगर निवासी महेंद्र सिंह, शेरसिंह तथा अख्तर अली निवासी कांशीराम कालोनी के खिलाफ दर्ज कराई। हत्या के बाद से महेंद्र जेल में बंद है। मामले के विवेचक तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आरबी शर्मा नोटिस के बाद भी एक साल से अदालत में नहीं आ रहे हैं। स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट रेनू राव ने उनके खिलाफ बिना जमानती वारंट जारी कर सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तारीख तय कर दी है।
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केस दो: अभियोजन के गवाहों को नहीं मिली सुरक्षा
थाना किशनी क्षेत्र में वर्ष 2008 में दलित के साथ मारपीट के आरोपी राकेश, सुनील, रनवीर, रामेश्वर के डर की वजह से गवाह अदालत में वर्ष 2008 से गवाही देने नहीं आ रहे हैं। पीड़ित हर बार केवल तारीख लेकर ही लौट रहे हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता अशोेक कुमार यादव ने अभियोजन पक्ष की गवाही कराने तथा गवाहों को सुरक्षा दिलाने के लिए डीएम और एसपी को पत्र लिखा है।

केस तीन: चार साल से गवाही में लटका मुकदमा
थाना घिरोर क्षेत्र में वर्ष 2013 में एक दलित की पिटाई की गई थी। घटना की रिपोर्ट घिरोर के मोहल्ला कुरैशियान निवासी असलम कुरैशी के खिलाफ दर्ज कराई। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी के डर की वजह से अप्रैल 2013 से अदालत में गवाही देने नहीं आ रहे हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शाक्य ने डीएम और एसपी को गवाही के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने को कहा।

पुलिस अधीक्षक राजेश एस का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। अभियोजन के गवाहों को सुरक्षा देने केे निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। पुलिस के गवाहों की भी समय से अदालत में गवाही दिलाई जाएगी। गवाही के चलते मुकदमों को लंबित नहीं होने दिया जाएगा।
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