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धुआं हुआ धूम्रपान-पॉलीथिन पाबंदी के आदेश

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पालीथिन
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धुआं हुए धूम्रपान और पालीथिन पर पाबंदी के आदेश
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एटा। निर्देश, आदेश और नसीहतें, सब कुछ जिले में धुआं है। चाहे वह धूम्रपान पर पाबंदी के आदेश हों या पॉलिथिन प्रतिबंध के। सुप्रीम कोर्ट के आदेश ताक पर हैं। प्रशासन ने आंखें बंद कर ली हैं। जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की रविवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की, तो जिले में हर जगह आदेश दरकिनार नजर आए।

दुकान से ठेलों तक पॉलिथिन
दो साल पहले हाइकोर्ट ने पॉलिथिन प्रतिबंध को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद प्रशासन पुलिस सब सतर्क नजर आए थे, लेकिन कुछ दिन बाद सारे नियम कानून धता बता दिए गए। आलम यह है कि जिले में पॉलिथिन पर प्रतिबंध नहीं लग सका है। बड़ी दुकानों से लेकर ठेलों तक पर पॉलिथिन में सामान की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है।
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पर्यावरण पर बदनुमा दाग
पॉलिथिन पर्यावरण और पशुओं के लिए घातक साबित हो रही है, लेकिन जिले से यह बदनुमा दाग मिट नहीं पा रहा है। पॉलिथिन के चलते भूमि को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं पॉलिथिन खाने से पशु मर रहे हैं।
धूम्रपान पाबंदी के आदेश भी हवा
जिले में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्र्रपान पाबंदी के आदेश तो धुआं हैं। साथ ही स्कूल कालेजों के पास भी धूम्रपान और गुटखे जमकर बिक रहे हैं। आलम यह है कि स्कूलों के बाहर ही गुटखों की लंबी कतारें लटकी रहती हैं, लेकिन अफसरों को कुछ नहीं दिख रहा है।

कहते हैं दुकानदार
पॉलिथिन प्रतिबंध को लेकर नियम तो आए हैं। जानकारी भी है। सभी पॉलिथिन में सामान देते हैं, तो हम भी देते हैं। पॉलिथिन सस्ती भी मिल जाती है।
अंकित जैन, व्यापारी

स्कूल कालेजों के पास सिगरेट-गुटखा बिकना बंद होना चाहिए, लेकिन इसे लेकर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। वहीं पॉलिथिन प्रतिबंध को लेकर प्रशासन खुद पहल करे, तो पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
कपिल वार्ष्णेय, व्यापारी

उपभोक्ताओं की सुनिए
व्यापारी पॉलिथिन में सामान देते हैं, तो लेना पड़ता है। अगर कोई व्यापारी कपड़े का थैला देता है, तो उसका अलग से शुल्क लेता है। पर, पॉलिथिन पर प्रतिबंध लगना आवश्यक है।
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विक्की, उपभोक्ता
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स्कूल कालेजों के बाहर ही नहीं सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान के नियम को सख्ती से लागू किया जाए। साथ युवाओं को नशे की रोक जाने से रोकने के लिए पहल की जाए।
पप्पन, उपभोक्ता
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