आगरा में औषधि विभाग के सर्वे में 450 थोक दवा विक्रेताओं में 70 से 80 मेडिकल एजेंसियां संदिग्ध मिली हैं। कई फर्म कागजों पर संचालित मिलीं, लेकिन उनके गोदाम और ऑफिस नहीं मिले। जिले के करीब तीन हजार थोक दवा विक्रेताओं का सर्वे किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद डमी फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
आगरा में औषधि विभाग के सर्वे में कई मेडिकल एजेंसी संदिग्ध मिल रही हैं। इनके गोदाम-ऑफिस नहीं है, लेकिन कागजों पर ये संचालित हैं। ऐसी फर्म की सूची बनाकर इनकी जांच की जा रही है। डमी फर्म मिलने पर इनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बीते दिनों नकली, सरकारी, सैंपल दवाओं की तस्करी पकड़ी। इसके बाद थोक दवा विक्रेताओं की जांच की जा रही है। जिले में करीब तीन हजार थोक दवा विक्रेता हैं, इनमें से करीब 450 की जांच हो गई है। इनमें 70 से 80 मेडिकल एजेंसी पाई गई है, जो बंद रहती हैं। गोदाम, प्रतिष्ठान और ऑफिस के पते भी गड़बड़ मिले हैं। इनके संचालकों के फोन नंबर भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में इनकी जीएसटी नंबर, पता और स्थानीय विक्रेताओं से जानकारी की जा रही है।
औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा का कहना है कि थोक दवा विक्रेताओं का सर्वे चल रहा है। इसमें फर्म का नाम, पता, संचालक का नाम, फोन नंबर, गोदाम का पता समेत अन्य की जांच की जा रही है। इसमें कई फर्म लंबे समय से बंद हैं। इनकी जांच पूरी होने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही अगर कोई फर्म ने दवा कारोबार करना बंद कर दिया है तो वह विभाग में लाइसेंस सरेंडर भी कर सकते हैं।