देश भर में इंद्र देव मेहरबान हैं। झमाझम बारिश ने रेगिस्तान में भी बाढ़ के हालात बना दिए, लेकिन आगरा में सूखे के हालात बन रहे हैं। पड़ोसी जिलों में भी बारिश कम है, लेकिन आगरा से फिर भी ज्यादा। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा में सबसे कम बारिश दर्ज हुई है, जबकि सबसे ज्यादा बारिश मुरादाबाद में।
गुजरात से लेकर असोम तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश में झमाझम बारिश हो रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश में मानसून दगा दे चुका है। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके तक बारिश में डूबे हुए हैं, लेकिन प्रदेश के 52 जिले सूखे से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा सूखे के हालात हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में। यहां भी आगरा में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। एक जून से 22 जुलाई की अवधि में आगरा में 212.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई केवल 81.6 मिमी ही। यह सामान्य से 62 फीसदी कम है। पड़ोसी मथुरा जिले में अच्छी बारिश हुई। यहां सामान्य से 50 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। आगरा से बेहतर हालात पड़ोसी जिलों में रहे। बेशक बारिश यहां भी कम हुई, लेकिन हालात इतने खराब भी नहीं। मैनपुरी, एटा, हाथरस, अलीगढ़ में कुछ कम बारिश हुई। फीरोजाबाद में सामान्य से कम, लेकिन आगरा से तीन गुनी बारिश हो चुकी है।
पड़ोसी भी हमसे ज्यादा भीगे
शहर बारिश औसत अंतर
आगरा 81.6 212.8 -62 %
मैनपुरी 139 210 -34 %
एटा 157 194 -19 %
फीरोजाबाद 213 222 -4 %
हाथरस 132 195 -32 %
अलीगढ़ 152 192 -21 %
मथुरा 264 175 50 %
धान की रोपाई प्रभावित होने से किसान चिंता में
एटा। धान की बुवाई के लिए बारिश जरूरी है, लेकिन कम बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं। जिले में 18,889 हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपाई होती है, लेकिन अभी तक 11,750 हेक्टेयर ही हुई है। किसानों ने सुगंधा और बासमती को प्राथमिकता दी है।
मैनपुरी में 65.36 फीसदी धान की रोपाई
मैनपुरी। 75,724 हेक्टेयर में धान की रोपाई होनी थी, लेकिन सामान्य से 34 फीसदी बारिश कम होने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। अब तक केवल 49,493 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा के अनुसार कम बारिश से धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। एक सप्ताह तक पर्याप्त बारिश और नहीं होती है तो धान के रकबे और उत्पादन दोनों में कमी आ सकती है।