कासगंज। सोरों के मुहल्ला पजाया में हुए भूमि घोटाले की जांच शुरू हो गई है। इस जांच में रजिस्ट्रार कार्यालय पर तलवार लटक रही है। प्रशासन विवादित जमीन पर बैनामे के लिए प्रथम दृष्टया रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारियों को दोषी माना है। एसडीएम ने पुराने दस्तावेज खंगालने के निर्देश तहसीलदार को दिए हैं।
प्रशासन ने सोरों की सरकारी जमीन पर अपना कब्जा कर नगर पालिका के सुपुर्द कर दी है। जालसाजी कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले जालसाज दयाराम को प्रशासन भूमाफिया घोषित कर रहा है। वहीं बैनामा कराकर कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने प्रथम दृष्टया रजिस्ट्रार कार्यालय को दोषी माना है। जमीन विवादित थी और प्रशासन से ही सीधा विवाद न्यायालय में चल रहा था। फिर भूमाफिया द्वारा कराए गए बैनामे रजिस्ट्रार कार्यालय ने कैसे दर्ज कर लिए। इसकी जांच एसडीएम ललित कुमार ने शुरू कराई है। तहसीलदार एसपी वर्मा जांच अधिकारी बनाए गए हैं। वह रजिस्ट्रार कार्यालय के दस्तावेजों को खंगालकर यह पता करेंगे कि विवादित जमीन के बैनामे किस रजिस्ट्रार ने किए और कौन-कौन कर्मचारी दोषी हैं। आरोप सिद्ध होने पर प्रशासन दोषियों के खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई करेगा। प्रशासन ने इस दिशा में काफी सख्त कदम उठाए हैं और इस प्रकरण को बड़ा भूमि घोटाला माना है।
आंकड़े की नजर से
-1987 में भू माफिया ने निबंधन कार्यालय में कराया था फर्जीवाड़ा
- 1999 में अवैध कब्जा धारक ने कर लिया था कब्जा
-2005 में न्यायालय से स्टे ले आया था माफिया
-2008 के बाद शुरू कर दिए थे बैनामे
-2018 में न्यायालय से निरस्त हुआ स्थगन
- विवादित जमीन पर प्लॉट काटकर भू माफिया ने बैनामे कर दिए, जबकि रजिस्ट्रार कार्यालय में इस विवादित जमीन के बैनामा नहीं कराया जा सकता। मामला न्यायालय में विचाराधीन था। प्रथम दृष्टया रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारी भी संदेह में है। मामले की जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। ललित कुमार, एसडीएम