फिरोजाबाद। नगर की सरकार को एक साल पूरा हो गया है। 12 दिसंबर 2017 को नूतन राठौर ने 70 पार्षदों के साथ नगर निगम की पहली महापौर के रूप में शपथ ली थी। नगर निगम बनने के तीन साल बाद हुए चुनाव में नगर की सरकार को शहर की जनता ने बहुत उम्मीदों के साथ चुना था। एक साल का रिपोर्ट कार्ड आमजन की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है।
जिले को चार अगस्त 2014 को नगर निगम का दर्जा मिला। लोगों को उम्मीद बंधी कि शहर का विकास होगा। खास कर 13 ग्राम सभाओं के साथ नगर निगम सीमा क्षेत्र में शामिल हुए नए इलाकों को विकास की उम्मीद जागी थी। यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद चुनाव हुआ।
एक दिसंबर 2017 को आए चुनाव परिणाम में नूतन राठौर के सिर पहली महापौर का ताज सजा। 12 दिसंबर 2017 को सभी 70 पार्षदों के साथ नूतन राठौर ने महापौर की शपथ ली थी।
शानदार जीत के बाद नूतन को शहर ने हाथो-हाथों लिया। शुरू के कुछ दिन स्वागत सम्मान के बाद जब कामकाज की बारी आई तो नगर सरकार को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। भाजपा के ही पार्षद महापौर के खिलाफ मोर्चाबंदी करने लगे।
फिरोजाबाद। एमबीए उर्त्तीण उच्च शिक्षित नूतन राठौर यूपी की सबसे कम उम्र की युवा मेयर बनीं। सीएम योगी के साथ-साथ पीएम मोदी ने नूतन को लखनऊ और दिल्ली बुला कर स्वच्छता का मंत्र दिया।
गुटबाजी के चलते नगर निगम में तैनात नगर आयुक्त, अपर आयुक्त, चीफ इंजीनियर, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता जैसे अफसरों से भी साल भर में तालमेल नहीं बैठ सका। कई अधिकारी अपना स्थानांतरण करा ले गए।
वार्ड-16 के वरिष्ठ पार्षद हरिओम वर्मा तीन बार नगर पालिका में सभासद रह चुके हैं। वह भाजपा से चुन कर पार्षद बने हैं। एक साल के रिपोर्ट कार्ड से वह चितिंत हैं। उनका कहना है कि एक साल में कोई भी ऐसा विशेष काम नहीं हुआ जो बतौर उपलब्धि हम बता सकें। काम करने वाले जो अधिकारी तबादला करा ले गए। कोई अधिकारी यहां आना नहीं चाह रहा है।
सपा पार्षद और नगर निगम में नेता विरोधी दल देश दीपक यादव का कहना है कि एक साल में निगम ने कोई काम नहीं कराया है। पार्षदों से आठ-आठ लाख रुपये से काम कराने के प्रस्ताव मांगे थे। इन प्रस्तावों के टेंडर तक नहीं हुए हैं।
स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर मयंक भटनागर कहते हैं कि लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक होना चाहिए। यह कहना गलत होगा कि शहर के हालातों के लिए एकमात्र महापौर या पार्षद ही दोषी हैं। ताली दोनों हाथ से बजती है।
हेमंत अग्रवाल बल्लू कहते हैं कि शहर को सूरत या इंदौर जैसा कैसे बनाया जाए इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। आपसी मतभेद विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। अच्छा होगा नई साल में मतभेद भुलाकर दोनों जनप्रतिनिधि शहर हित में आगे बढ़ें।
समाजसेवी और सेवार्थ संस्थान के अध्यक्ष पीके झिंदल का कहना है कि केंद्र-प्रदेश और शहर में भाजपा की सरकार है बावजूद इसके शहर में विकास की गाड़ी नहीं दौड़ पा रही। अधिकारी यहां से भाग रहे हैं। पार्षद मेयर पर और मेयर पार्षद पर आरोप लगा रही हैं।
महापौर नूतन राठौर कहती हैं कि नगर निगम के हालात अपने लोगों ने ही खराब कर दिए हैं। माननीय के हस्तक्षेप के कारण कोई अधिकारी यहां आना नहीं चाहता। अपर नगर आयुक्त की तैनाती की गई है लेकिन वह भी यहां आने से कतरा रहे हैं।
अधिकारियों को धमकाया जाता है तो फिर कौन यहां काम करने आएगा? मुझे तो राजनीति में महज एक साल हुआ है, व्यवधान डालने वाले राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। माहौल सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। मलिन बस्तियों के सुधार के लिए 33 करोड़ रुपया शासन से मांगा है। 15 करोड़ से अधिक के कार्यों के प्रस्ताव पास हुए हैं इन पर शीघ्र काम शुरू होगा।