कासगंज। जिस मां के बच्चे उसके सामने ही काल के गाल में समां गये हों उस पर क्या बीत रही होगी इसका अंदाजा लगाना सहज ही है। सुजानपुर में छत गिरने से तीन बच्चों की मौत के बाद उनकी घायल में अस्पताल में भर्ती है। उसे जैसे ही होश आता वह अपने बच्चों को आवाज लगाती और उनको आते न देख वह फिर बेहोश हो जाती। वहीं तीन बच्चों को गवां चुका पिता अपने दोनों घायल बच्चों को ऐसे सीने से लगाये था जैसे उसे डर हो कि कोई उनको भी उनसे न छीन ले। अस्पताल में जिसने भी यह दृश्य देखा उसका मन और आंखें दोनों ही भर आईं।
हादसे के दौरान सभी बच्चे मां के अंाचल से लिपटकर बारिश की भयावह रात में सो रहे थे। पिता अंगनलाल घर पर नहीं थे। गुरुवार रात परिवार के लिए काल बनकर आई। मां शारदा देवी जिला चिकित्सालय के बेड पर लेटी थी। उसके बाएं हाथ में प्लास्टर चढ़ा था और ड्रिप चढ़ रही थी। वह बेबस थी जो अपने बच्चों के मासूम चेहरे नहीं देख पा रही थी। ऐसी स्थिति में वह बार बार बच्चों को याद कर रही थी और गरीबी को ताना दे रही थी। परिवारीजन मां शारदा के पास जाते और उसे ढांढस बंधाते, लेकिन आखिर वह सब्र करती तो कैसे। उसके आंचल से मौत ने तीन बच्चे जो छीन लिए थे। वह बच्चों का आवाज लगाती और फिर बेहोश जाती। पिता अंगनलाल की आंखों से आंसू गिर रहे थे। चेहरे पर हादसे की दहशत साफ नजर आ रही थी। वह अपने दोनों घायल बच्चे सत्येंद्र और गौरी को कलेजे से लगाए बैठा था। वह बार बार अपने बच्चों को याद करता और उस मनहूस घड़ी को कोसते हुए बिलख उठता।
पिछले वर्ष सौरभ के जुड़वां भाई की हुई थी मौत
कासगंज। हादसे में जिस बच्चे सौरभ मौत हुई उसके जुड़वां भाई गौरव की पिछले वर्ष बीमारी के चलते मौत हो गई थी। परिवार पहले से ही गौरव के जाने का गम झेल रहा था। तीन बच्चों की मौत तो जैसे पहाड़ बन कर टूट पड़ी। परिवार के लोग गौरव के गम से उबरते नहीं उससे पहले तीन और बच्चे और मौत का शिकार हो गए।
गांव में हर आंख में नजर आए आंसू
कासगंज। हादसे में तीन बच्चों की मौत से ऐसा हाहाकार मचा कि पूरे गांव में ही अफरा तफरी मच गई। सभी ग्रामीण गरीब परिवार के बच्चों की मौत के गम में नजर आए। महिला हो या पुरुष सभी घटनास्थल की ओर पहुंच रहे थे। मृत अवस्था में मासूमों के चेहरे देखकर हर किसी की आंखों में आंसू झलक आये थे। गम का आलम यह था कि बड़ी संख्या में गांव के लोग और महिलाएं भी पोस्टमार्टम हाउस पर आ गईं।
बारिश के कारण नगला कटीला में रूका था अंगनलाल
कासगंज। हादसे के समय पिता अगनलाल बारिश होने के कारण पड़ोसी गांव नगला कटीला में रुका था। वह ग्रामीण पोखी के यहां बाग की रखवाली का हिसाब किताब करने गया था, लेकिन तेज बारिश होने के कारण उसे रात को वहीं रुकना पड़ा। हादसा हो जाने के बाद लोगों ने उसे जब जानकारी दी तब वह बदहवास होकर वापस लौटने लगा।