जलेसर (एटा)। घुंघरू घंटी की नगरी को आजादी के 70 वर्षो से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। सीएम योगी के आगमन पर जलेसर के लोगों को खासी उम्मीद थी, मगर एक बार फिर घंटा लोगों को सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है।
जनसभा में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को पालिकाध्यक्ष विकास मित्तल ने 101 किग्रा का घंटा देकर स्वागत किया था। प्रतीक चिन्ह के रुप में दिया गया जलेसर का घंटा गोरखनाथ मंदिर में लगाया जाएगा। जनसभा में सीएम ने मंच से इस बात को स्वीकार भी किया था कि एटा की पहचान घंटा है। प्रदेश के मुखिया ने जलेसर के घुंघरू घंटी उद्योग की तारीफ तो की लेकिन उसके विकास के लिए कोई घोषणा न करके जलेसर की जनता को निराश जरूर किया।
हालांकि सीएम योगी ने जलेसर विधायक संजीव दिवाकर और पालिकाध्यक्ष विकास मित्तल को आश्वासन दिया है कि वह जलेसर के उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेंगे। इसके लिए व्यापारियों के साथ लखनऊ आने का निमंत्रण भी दिया है। जहां उद्योग की समस्याओं का न केवल समाधान निकाला जाएगा बल्कि विकास की योजना भी तैयार किए जाने की बात कहीं है।
पूर्व में भी सीएम देते रहे हैं आश्वासन
जलेसर। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि सीएम ने जलेसर के लोगों को आश्वासन दिया हो। अब से पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, कल्यान सिंह, राजनाथ सिंह आदि चुनावी सभा में इस तरह के आश्वासन देते रहे हैं। मगर हर बार आश्वासन कब तक पूरा होगा। यह देखना है।
पटना पक्षी विहार भी उपेक्षा का शिकार
जलेसर। आजादी के बाद वर्ष 1984 में जिले में स्थापित किया गया एक मात्र पर्यटन स्थल पक्षी विहार भी उपेक्षा का शिकार है।
राजनेता सिर्फ आश्वासन देते ही चले आ रहे हैं। जब तक जलेसर को कुछ मिल नहीं जाता। तब तक अब हम इन आश्वासन को नहीं मानते।
जितेंद्र वार्ष्णेय, समाजसेवी
-सरकारें कब तक जलेसर के लोगों के सब्र का इंतहान लेती रहेंगी। अब सरकारों को आश्वासन नहीं विकास कराना होगा।
मनोज बजरंगी, व्यापारी
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते जलेसर का विकास नहीं हो पाया है। अब जरूरी है जनप्रतिनिधि विकास कराकर दिखाए।
निर्मल गुप्ता, व्यापारी
घुंघरू घंटी के नाम से पहचान बना चुके नगर के लोगों को अब आश्वासन नहीं विकास की जरूरत है।
पवन ठाकुर, भाकियू नेजा