जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश त्रिपाठी ने नाबालिग छात्रा की क्रूरतापूर्वक हत्या करने के मामले में तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तीनों पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया है। न्यायालय ने कुल 1.80 लाख के जुर्माने की राशि को मृतक छात्रा के पिता को देने निर्देश दिए हैं।
वर्ष 2013 में 17 अक्टूबर को हाईस्कूल की छात्रा पूजा (14) निवासी नगला गुलरिया की ओमवीर उर्फ पतरा, उसके भाई मुकेश एवं पिता नेम सिंह ने उस समय हत्या कर दी थी जब छात्रा सुबह करीब साढ़े 8 बजे स्कूल पढ़ने जा रही थी। छात्रा की हत्या हसिया से गला काटकर की गई। पुलिस ने नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कर जेल भेजा था। बाद में इस मामले की विवेचना करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी सत्यदेव सिंह सिद्धू ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए। इस सनसनीखेज मामले में न्यायालय में शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रमेश चंद्र गोला एवं बचाव पक्ष के अधिवक्ता के बीच काफी बहस हुई। शासकीय अधिवक्ता ने इस घटना को बिरल से बिरलतम की श्रेणी का बताया और अधिकतम सजा पर बल दिया। जिला जज ओपी त्रिपाठी ने इस मामले में तीनों ही आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने धारा 302 एवं धारा 34 में आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार का जुर्माना आरोपित किया। वहीं धारा 354 क में दोष सिद्ध पाते हुए सश्रम कारावास की सजा एवं 10-10 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया। जिला जज ने अपने निर्णय में कहा कि जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी और सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। तीनों ही आरोपियों से वसूली जाने वाली जुर्माने की धनराशि 1.80 लाख रुपये छात्रा के पिता को बतौर प्रतिकर देने के निर्देश दिए।