रवि के ़10 साल बाद वापस लौट आने से परिवार में खुशी की लहर है। उसकी दादी की आंखों में सुकून के भाव हैं तो गांव के लोग आश्चर्य जता रहे हैँ। रवि भी अपने परिवार में वापस लौट आने से काफी खुश है।
कुंवर सिंह ने वर्ष 2007 में अपनी पत्नी शीला एवं अपने पांच वर्षीय बालक रवि व 11 वर्षीय बेटे विवेक को अपनी ससुराल मारहरा एटा के लिए बस में बिठा दिया। लेकिन मां बेटे मारहरा नहीं पहुंचे। रास्ते में ही कहीं लापता हो गए। पत्नी एवं बच्चों के लापता हो जाने के बाद परिवार में चिंता होने लगी। परिवारीजन उनकी तलाश में जुट गए, लेकिन उनका कोई पता नहीं लग सका। कुंवर सिंह अपनी पत्नी व बच्चों के लौटने की आस छोड़ चुका था। पिता के सामने घर पर रह गई बेटी हेमलता व नीतू का पालन पोषण की चिंता हो गई। उसने चार साल पहले गुडडो देवी पुत्री सुनहरी लाल निवासी कल्यानपुर मिरहची एटा से शादी कर ली।
इस बीच रवि अपनी मां से बिछुड गया और 2010 में दिल्ली चला गया। जहां से वह पलवल चला गया। पलवल पुलिस ने उसे एक महिला के सुपुर्द कर दिया। महिला उससे घर के झाडू पोंछा कराने लगी। जिससे वह वहां से भाग कर पलवल में ही एक होटल पर काम करने लगा। जब उसका मन वहां से उचट गया तो वह फरीदाबाद के लिए रवना हो गया। इसके बाद वह पंजाब चला गया। वर्ष 2011 में वह आगरा आ गया। जहां से पुलिस ने स्टेशन से उसे पकड़कर फिरोजाबाद बाल सुधार गूह भेज दिया। तब से वह वहीं पर रह रहा था। जहां रहकर उसने कक्षा पांच तक की पढाई भी की।उसने बाल सुधार गृह में अपने को कासगंज के ततारपुर गांव का रहने वाला बताया। बाल सुधार गृह की टीम ने गांव पहुंची तो उसने अपना घर पहचान लिया। परिवाीजनों को जब पता चला कि यह उनका बिछुड़ा बेटा रवि है तो उनकी आंखे खुशी से छलक पड़ी। उसकी दादी लीलबाती ने बचपन मेे हाथ पर जले के निशान से उसे पहचान लिया। परिवारीजनो ने उससे दूसरे भाई व मां के बारे में पूछा लेकिन वह उनके बारे में जानकारी नहीं दे सका। टीम उन्हें फिरोजाद आने के लिए कह गई। गुरुवार को वहां की बाल कल्याण समिति ने उसे परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया। जिसे परिवरीजन उसे अपने गांव लेकर लौट आए। उसके गांव लौट आने पर ग्रामीणो में भी उत्सुकता है। ग्रामीणों का उसके घर पर जमाबड़ा लग रहा है। हर कोई उसके बारे में जानना चाह रहा है। ग्रामीणों ने अब तक बिताए उसके जीवन के बारे में जानकारी की। पिता ने कहा कि उन्होंने काफी तलाश की थी। उसे अपनी पत्नी शीला व दूसरे पुत्र विवेक के न मिलने का अभी भी गम है। दादी तो उसके लौट आने के बाद से काफी खुश है वे उसे बार बार दुलार करती हैं।