मथुरा। यमुना प्रदूषण के मामले में डीएम और नगर आयुक्त के इलाहाबाद हाईकोर्ट में फंसने के बाद अब ऐसी स्थिति से बचने के लिए नवागत डीएम ने सामंजस्य बनाने की पहल की है। तय किया गया है कि अब बगैर सत्यापन के कोई भी शपथ पत्र किसी भी विभाग का अधिकारी कोर्ट में दाखिल नहीं करेगा।
यमुना प्रदूषण को लेकर वृंदावनवासी मधुमंगल शुक्ला की इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका पर डीएम और नगर आयुक्त द्वारा अलग-अलग दो विपरीत शपथ पत्र दाखिल किए जाने के कारण तीन अफसराें पर गाज गिर चुकी है। इस स्थिति से बचने के लिए डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने एनजीटी के मामलाें की समीक्षा करते हुए भविष्य में दाखिल होने वाले शपथ पत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। डीएम ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि कोई भी विभाग अब सीधे शपथ पत्र दाखिल नहीं करें।
मामला अन्य विभागों से जुड़ा होने पर उसकी समीक्षा कर लेनी चाहिए। उन्होंने गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में अतिक्रमण, वन विभाग की जमीन पर कब्जा को लेकर एनजीटी में चल रही सुनवाई पर एमवीडीए सचिव को ब्रज तीर्थ विकास परिषद उपाध्यक्ष के साथ बैठक के निर्देश दिए। डीएम ने आचार्य बद्रीश, महंत मधुमंगल शुक्ला, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी की एनजीटी में दायर याचिकाओं की भी जानकारी ली। इस दौरान नगर निगम, पीडब्लूडी, एमवीडीए, वन, जल निगम सहित विभिन्न विभागों के अफसर मौजूद रहे।