गोवर्धन (मथुरा)। एक रूप से पुजत हैं, दूजे रहे पुजाय, सहस्र भुजा फैलाय कें मांग-मांग के खाय..। कुछ इसी अभिव्यक्ति के साथ कलियुग के प्रथम देवता गिरिराजजी का पूजन किया गया। इस दौरान उनका स्वर्ण आभूषणों से शृंगार किया गया। भक्त उनकी यह छटा देख निहाल हो गए।
गो-संवर्धन के केंद्र गोवर्धन धाम में मानसी गंगा के तट स्थित मुकुट मुखारबिंद मंदिर पर अद्भुत शिला के बीच कृष्ण और गिरिराज जी दोनों स्वरूपों में दर्शन देते हैं। गोवर्धन पूजा के तीन दिवसीय महोत्सव का समापन शनिवार को हो गया। महोत्सव में गिरिराज के अभिषेक के बाद स्वर्ण जड़ित आभूषणों से उनका शृंगार किया गया। मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के निर्देशन में गिरिराजजी का स्वर्ण जड़ित मुकुट, हार, बांसुरी, कुंडल, पत्रक आदि से शृंगार किया गया। फूलबंगला में गिरिराजजी को प्राकृतिक स्वरूप में विराजमान किया गया।
गोवर्धन पूजा महोत्सव में प्रतिदिन स्वामी रामस्वरूप के निर्देशन में श्रीकृष्ण की लीलाओं के दर्शन हो रहे हैं। मानसी गंगा में काली दह लीला का भी मंचन किया गया। शनिवार को यम द्वितीया के लिए मानसी गंगा पर फव्वारे लगाए गए। यम द्वितीया पर बड़ी संख्या में भाई-बहनों ने मानसी गंगा में स्नान किया।