सोरों। सूकर क्षेत्र की भूमि पर धर्म गुरुओं, संतों के आगमन का सिलसिला प्राचीन समय से है। विभिन्न धर्मों के गुरु और संत यहां आए और प्रवास किया। भगवान वराह के प्राकट्य क्षेत्र में अधिकांश धर्मों के गुरुओं के पहुंचने का उल्लेख है। सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने भी 566 वर्ष पूर्व संवत 1508 में सूकर क्षेत्र आकर प्रवास किया था। सूकर क्षेत्र में प्राचीन गुरुद्वारा भी है, जो अगाध श्रद्धा का केंद्र है।
सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने सूकर क्षेत्र में आकर गंगा स्नान किया। यहां उन्होंने भगवान वराह के दर्शन किए और संगत की। उन्होंने कई दिन प्रवास किया। इसके बाद संवत 1641 में सिखों के छठवें गुरु हरिगोविंद साहिब ने भी यहां आकर प्रवास किया। वह नानक मत्ता साहिब से पीलीभीत होकर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष नवमी के दिन यहां पहुंचे थे। उन्होंने यहां गंगास्नान किया और भगवान वराह के दर्शन किए। इसके बाद संगत में जनकल्याण के प्रवचन दिए। इस वराह तीर्थ से गुरु हरि गोविंद साहिब इतने प्रभावित थे कि उन्होंने इस तीर्थ के पुरोहित ब्राह्मण को हस्तलेख हुक्मनामे दिए। यह हुक्मनामे गुरुद्वारा छठवीं पातशाही सोरों में संरक्षित हैं। इन हुक्मनामे के श्रद्धालु गुरुद्वारे में दर्शन करते हैं। यही कारण है कि गुरु हरि गोविंद साहिब द्वारा प्रवास किए स्थान पर ही गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया। गुरुद्वारे के निर्माण के बाद से यहां लगातार कार्यक्रम आयोजित होते हैं। गुरु हरि गोविंद साहिब के आगमन का ही प्रमाण है कि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष नवमी को प्रतिवर्ष सिख समाज धर्म के लोगों द्वारा विशाल जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में देश के विभिन्न स्थानों से संगत भागीदारी करने आते हैं। गुरुनानक देव एवं गुरु हरि गोविंद साहिब की सूकर क्षेत्र की भूमि पर आगमन से सिख धर्म के लोगों की भी इस सूकर क्षेत्र की भूमि में अगाध श्रद्धा है।
- सूकर क्षेत्र की पवित्र भूमि का प्रताप है कि यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव एवं छठवें धर्म गुरु हरिगोविंद साहिब का आगमन हुआ। तीर्थनगरी के गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थनगरी का दर्जा मिलना चाहिए
ज्ञानी इंद्रजीत सिंह, गुरुद्वारा छठवीं पातशाही
- सोरों सूकर क्षेत्र हिंदू धर्म के लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसके बावजूद सरकारें इस महत्वपूर्ण स्थान का विकास कराने के प्रति उदासीन है। क्षेत्र में विकास करा इसे तीर्थस्थल घोषित किया जाए
- गिर्राज किशोर अग्रवाल, सराफा कारोबारी
- सोरों अत्यंत पवित्र स्थान है। हमारी चार पीढ़ियों से परिवार के लोग लगातार यहां आकर भगवान वराह दर्शन और गंगा स्नान करते हैं। परिवार के दिवंगत होने वाले परिवारीजनों की अस्थियां भी यहां विसर्जित की जातीं हैं। हरिपदी में अस्थियां जलरूप में परिवर्तित हो जाती हैं। यहां का विकास बेहद आवश्यक है- हरिराम, श्रद्धालु, झालावाड़, राजस्थान
- इस प्राचीन तीर्थ में पुरखों के समय से आस्था जुड़ी हुई है। आस्था के चलते आज भी हम और परिवार के लोग इस तीर्थस्थान पर आकर पूजा अर्चना करते हैं और मंगलकामना करते हैं। यह पवित्र स्थान है। यहां का विकास होगा तो श्रद्धालुओं को अच्छा महसूस होगा- श्रद्धालु राकेश कुमार अग्रवाल,नाई की मंडी,आगरा