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सूखा बीता जुलाई, खेतों को चाहिए सिंचाई

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Field - फोटो : Bureau
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आगरा। जुलाई के महीने में सामान्य से आधी से भी कम हुई बारिश ने किसानों के माथे पर पसीना ला दिया है। अब हालात सूखे के हो रहे हैं। सूबे के सबसे ज्यादा सूखे 5 शहरों में आगरा भी शामिल है। बारिश न होने से खेतों को अब सिंचाई चाहिए। किसानों ने जो फसल बोई है, वह अब सूखने के कगार पर है। बीते साल की जुलाई के मुकाबले इस साल एक तिहाई भी बारिश नहीं हो पाई है। दो साल पहले के सूखे जैसे हालात इस साल बने हुए हैं।
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मानसूनी बारिश के बदले ट्रेंड के बीच आगरा सूखे के कगार पर है। मानसून के दस्तक देने के बाद से ही हर सप्ताह बादल धोखा देकर आगे बढ़ते गए। एक जुलाई को हुई झमाझम बारिश के बाद से ही आगरा में तेज बारिश नहीं हुई। मानसून के बादल पड़ोसी जिलों में खूब बरस रहे हैं, लेकिन स्थानीय सिस्टम न बनने से आगरा में सूखा बरकरार है। ताजनगरी में बादलों को नमी और दबाव का क्षेत्र नहीं मिल पा रहा। लगातार चार सप्ताह से सामान्य से कम बारिश आगरा में हुई है।

दो साल लगातार पड़ा सूखा
इस साल सूखे जैसे हालात है, वहीं दो साल पहले भी आगरा सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। साल 2014 में 73.9 मिमी और साल 2015 में 57.2 मिमी बारिश जुलाई में हुई थी। मानसून की बारिश न होने से इन दोनों ही सालों में किसानों को जबरदस्त नुकसान हुआ था। साल 2012 और 2013 में भी सामान्य से कम बारिश हुई। बीते 6 सालों में केवल एक बार ही जुलाई में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकी है।
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