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कोरोना रिकार्ड: 55 मौतें दर्ज, 88 ने लिया मुआवजा

सार

स्वास्थ्य विभाग में हुए खेल के खुलासे की पोल उसके ही आंकड़ों ने खोल दी है।लेकिन शासन ने जब मृतकों को मुआवजा देने का आदेश किया तो यह संख्या बढ़कर 88 से अधिक की हो गई।प्रश्न यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी खेल क्यों की।
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विस्तार
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कासगंज। स्वास्थ्य विभाग में हुए खेल के खुलासे की पोल उसके ही आंकड़ों ने खोल दी है। दरअसल हुआ यूं कि विभाग ने कोरोना संक्रमण से जिले में 55 लोगों की हुई मौत का आंकड़ा शासन को भेजा। लेकिन शासन ने जब मृतकों को मुआवजा देने का आदेश किया तो यह संख्या बढ़कर 88 से अधिक की हो गई। अब तक कोरोना संक्रमण से हुई मौत के 88 मृतकों के परिजनों को मुुआवजा प्रशासन दे चुका है। यह आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है।
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जिले में मार्च 2020 में कोरोना की दस्तक शुरू हो गई थी। इस लहर में बढ़ी संख्या में लोग कोरोना की चपेट में आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। बता दें कि जिले में कोरोना की दूसरी लहर ने काफी तबाही मचाई, जितने लोगों की मौतें हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अपने रिकार्ड में दर्ज नहीं किया । विभागीय सूत्रों की मानें तो इस दौरान 2292 लोग कोरोना की चपेट में आए। जिले में आक्सीजन की कमी पड़ने से तमाम लोगों को बाहरी जनपदों में दौड़ लगानी पड़ी। मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल व मिशन अस्पताल में व्यवस्थाएं की गई, लेकिन ये अस्पताल भी कोरोना मरीजों को इलाज की सुविधा मुहैया नहीं करा पाए। अस्पताल में इलाज के दौरान आए दिन मौत के मामले सामने आने लगे, लेकिन इनमें से तमाम मौतें विभाग ने कोरोना से न दर्शाकर बीमारी और अन्य कारणों से होना बता दिया। इस दौरान विभाग ने 53 लोगों के मौत की पुष्टि की। तो वहीं तीसरी लहर में दो लोगों की मौत होना बताया । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। इसके बाद जिले में 88 लोगों ने अपने आवेदन जांच सर्टिफिकेट एवं अन्य साक्ष्य के साथ किया। आवेदन करने वाले लोगों के साक्ष्यों की जांच कराएं जाने के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया है। प्रश्न यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी खेल क्यों की।
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