मुगल बादशाह शाहजहां के 362वें उर्स के दूसरे दिन सोमवार को असली कब्रों पर संदल की रस्म अदा की गई। दोपहर दो बजे भूमिगत कमरे में बनी शाहजहां और मुमताज की असली कब्रों पर गुलाब और केवड़े की शीरनी के साथ गुलाब के फूलों की चादर भी पेश की गई। इसके बाद फातिहा और दुआ की गई। मंगलवार को उर्स के आखिरी दिन ताजमहल में सुबह से ही प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
पूरे दिन चादरपोशी होगी। खुद्दाम ए रोजा कमेटी की ओर से एक हजार मीटर की सतरंगी चादर आकर्षण होगी तो फूलों और मोतियों की चादर भी पेश की जाएगी। सुबह सूर्योदय से सूर्यास्त तक ताजमहल में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
दोपहर दो बजे एएसआई अधिकारी और उर्स क मेटी के सदस्य संदल की रस्म अदा करने पहुंचे। रॉयल गेट से कव्वालियों के साथ शाहजहां की कब्र तक खादिम सिरों पर संदल के थाल सजाकर चले। उलेमाओं के साथ मिलकर यह रस्म अदा कराई गई।
उलेमा ए इकराम ने खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान एएसआई डिप्टी सुपरिंटेंडेंट केए कबुई, वरिष्ठ संरक्षण सहायक मुनज्जर अली, रतन लाल, उर्स कमेटी से ताहिरउद्दीन ताहिर, मुनव्वर अली, आरिफ तैमूरी, आदिल बेग, सलाउद्दीन, मुदस्सर खां आदि शामिल रहे।
उर्स में बेकाबू हो रहे लोग
उर्स में दोपहर दो बजे के बाद प्रवेश नि:शुल्क करने से ताजगंज समेत कई क्षेत्रों से बड़ी तादात में स्थानीय लोग असली कब्रें देखने पहुंचे। इससे मुख्य गुंबद पर भीड़ बढ़ी तो लोगों ने मनमानी शुरू कर दी। ताज पर एएसआई के नियमों को दरकिनार करते हुए कोई रेलिंग पर चढ़ा तो कोई ऊपर से ही फांदता दिखा। ताज की पच्चीकारी को रेलिंग पार कर उखाड़ते कई लोगों को एएसआई कर्मचारियों ने रोका।
उर्स और बूंदाबांदी का संयोग बरक रार
शाहजहां के उर्स में बारिश, बूंदाबांदी का संयोग कई साल से बन रहा है। इस बार अप्रैल में पारा 45 डिग्री पार करने के बाद लोगों की नजरें इसी पर थीं कि इस बार यह संयोग बनेगा या नहीं, लेकिन मौसम ने एकाएक करवट ली और सोमवार शाम को अचानक बादल छाए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी के साथ ही तपिश से भी लोगों को राहत मिली।