कासगंज। जिले में बाढ़ का कहर लगातार बना हुआ है। गुरुवार को भी नरौरा से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज बरकरार रहा। लोगों को कोई राहत नहीं मिल पा रही। परेशान लोग बाढ़ से बचाव करने जुटें हैं। बिगड़ते हालातों में लोगों ने अपने आप को ईश्वर के भरोसे छोड़ दिया। वहीं मेहोल बांध में दरार आने पर कटान की स्थिति बनने लगी। सिंचाई विभाग ने बांध की मरम्मत कराई है।
गुरुवार को नरौरा से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज बना हुआ था। यह डिस्चार्ज पिछले कई दिनों से बना हुआ है जिसके कारण हालात विकराल होते जा रहे हैं। यहां पानी ओवर फ्लो होने के कारण सोरों के लहरा के अलावा समीपवर्ती गांव बाढ़ की चपेट में आए हुए हैं। यहां गुरुवार को भी बाढ़ के पानी बढ़ोत्तरी हुई। लहरा पर पानी ओवर फ्लो होने के कारण कछला तक नहीं पहुंचा। इससे कछला के गेज 5 सेंटीमीटर जलस्तर में गिरावट बताने लगा। पानी के दबाव के कारण मेहोल बांध में रिसाव के हालात पैदा हो गए जिससे बाढ़ के कटने का खतरा बढ़ गया। ग्रामीणों की सूचना पाकर सिंचाई विभाग की टीम ने मरम्मत में जुट गई जिससे रिसाव रुक गया। यदि गंगा के पानी में बढ़ोत्तरी नहीं रुकी तो बाढ़ का दायरा और अधिक बढ़ जाएगा।
बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पटियाली तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में है। पानी में डूबी फसलें पीली पड़ने लगीं हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार हालात खराब हो रहे हैं। बीमारी पैर पसार रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों का जन जीवन पूरी तरह से चौपट हो गया है। अभी राहत की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही क्योंकि पहाड़ों पर भी लगातार बारिश हो रही है। यदि जलस्तर में कुछ कमी आती भी तब भी राहत मिलना मुश्किल है। क्योंकि एक दो दिन के बाद फिर से जलस्तर बढ़ने लगता है।
बाढ़ के पानी में निकला मगरमच्छ
कासगंज। बाढ़ प्रभावित सहवाजपुर पश्चिमी इलाके में एक मगरमच्छ बाढ़ के पानी में आ गया। पानी से बाहर निकलने पर मगरमच्छ पर ग्रामीणों की नजर पड़ी। बाद में ग्रामीणों के पहुंचने पर मगरमच्छ पानी में भागने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने मगरमच्छ को पकड़ लिया। वन कर्मी भी मौके पर पहुंच गए। मगरमच्छ वन कर्मियों को सौंप दिया गया।
डिस्चार्ज-
नरौरा- 202234 क्यूसेक
बिजनौर- 117843 क्यूसेक
हरिद्वार- 85241 क्यूसेक
कछला गेज- 163.70 मीटर के निशान पर।
गुरुवार को नरौरा से पानी का डिस्चार्ज दो लाख से ऊपर रहा, लेकिन बिजनौर और हरिद्वार से डिस्चार्ज कम हुआ है। जिसके कारण अब नरौरा से डिस्चार्ज कम होगा। डिस्चार्ज कम होने पर जलस्तर में गिरावट आएगी और बाढ़ पीड़ितों को राहत मिलेगी। एके सिंह, सहायक बाढ़ प्रभारी।