झोलाछाप ने कराया जबरन गर्भपात, मौत
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कासगंज। घर में संचालित क्लीनिक पर गर्भपात के दौरान एक महिला की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों ने जाम लगा दिया। पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया। ऐसा आरोप है कि इस महिला को एक आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी की पत्नी झोलाछाप के पास लेकर गई थीं। तीनों ही महिलाएं फरार हैं। सीएमओ ने सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि परिजनों की तरफ से समाचार लिखे जाने तक किसी के खिलाफ तहरीर नहीं दी गई थी।
ममता (28) पत्नी बबलू निवासी सिरसाबदन करीब साढ़े छह माह की गर्भवती थी। कुछ दिक्कत होने पर परिजन उसे बुधवार को बिड़ला महिला चिकित्सालय लेकर आए। यहां उसे गेट पर ही आशा राजकुमार और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी की पत्नी चंपा मिल गईं। दोनों ने महिला के परिजनों को बहका दिया। इसके बाद वे उनको चकैया बस्ती क्षेत्र में संचालित एक घर में चल रहे क्लीनिक पर ले गईं। यहां झोलाछाप दाई केसर जहां ने बच्चे में दिक्कत गर्भपात करा दिया। इसके लिए उसने महिला के परिजनों से छह हजार रुपये लिए। गुरुवार सुबह महिला की तबियत बिगड़ने लगी तो परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए, लेकिन हालत गंभीर देखकर वहां पर चिकित्सकों ने बाहर ले जाने की सलाह दी। इसी बीच महिला की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों ने महिला बिड़ला अस्पताल के बाहर शव रखकर जाम लगा दिया। जाम लगने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने समझा-बुझाकर शांत किया। सूचना पर सीएमओ डॉ. रंगजी दबेे भी मौके पर आ गए। उन्होंने परिजनों को दोषियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए हैं।
पिता के सामने चार बच्चों को पालने की चिंता
ममता के पहले से चार बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी रश्मि (10), जाश्मि (6), सुमित (4) अर्चना (2) हैं। उसका पति बबलू मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। पत्नी की मौत से अब उसके सामने सबसे बड़ी चिंता इन बच्चों के पालन पोषण की है।
मिलीभगत से चल रहे अवैध गर्भपात केंद्र
जनपद में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों की मिली भगत से अवैध तरीके से इस तरह के केंद्र संचालित हो रहे हैं। विभाग की आशा अपने कमीशन के चक्कर में प्रसूता महिलाओं को महिला चिकित्सालय पर न लाकर ऐसे केंद्रों पर ले जाती है। उनके लालच में या तो महिला की जान चली जाती है या फिर प्रसूता को मिलने वाली सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता।