मथुरा। आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा ने मंगलवार को मथुरा प्राधिकरण की अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी। मंगलवार दोपहर को उनके प्राधिकरण में पहुुंचने से हड़कंप मच गया। उन्होंने दर्जनों फाइलें देखीं और अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की।
प्राधिकरण के प्राइवेट कर्मचारी रहे सुरेन्द्र कुमार ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि शासनादेश एवं नियमों के विरुद्ध कई कर्मचारियों ने अनुचित वेतन वृद्धि का वित्तीय लाभ प्राप्त कर सरकारी कोष को वित्तीय क्षति पहुंचाई है। विकास प्राधिकरण द्वारा हुडको से पर्र्यटन एवं विकास के नाम पर 24.44 करोड़ रुपया लिया गया। इस धनराशि से संविदा कर्मचारियों का भुगतान, गाड़ियों का भुगतान किया गया।
आरोप है कि मथुरा वृंदावन प्राधिकरण को इससे 6.91 करोड़ की क्षति पहुंची। शिकायत में बताया है कि तत्कालीन उपाध्यक्ष आर के सिंह द्वारा गलत तरीके से भूमि आवंटित की गई। कृष्णा विहार आवासीय योजना में खैर अलीगढ़ निवासी महिला को 2400 वर्गमीटर जमीन मात्र 70 लाख में दी गई। जबकि इसकी बाजार में कीमत चार करोड़ रुपये है। यह जमीन शिक्षण संस्था के नाम पर फर्जी तरीके से ली गई।
शिकायत में कहा गया है कि विकास प्राधिकरण कार्यालय में हुई अनियमितताओं, भूमि आवंटन एवं सरकारी धन के दुरुप्रयोग में अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक शामिल हैं। उसका आरोप है कि इन अधिकारियों द्वारा बिना टेंडर प्रक्रिया के ही अपने रिश्तेदारों के वाहनों को प्राधिकरण में लगाया गया और फर्जी फर्मों के नाम से भुगतान भी किए गए। इस संबंध में आगरा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा ने बताया कि यह शिकायत लोकायुक्त द्वारा उन्हें सौंपी गई है।