स्वास्थ्य सेवाओं को सही तरीके से मरीजों को मुहैया कराने का दावा करने वाले प्रशासन ने मरीजों को दवाओं के लिए मोहताज कर दिया है। जिला अस्पताल में दवाइयों का टोटा हो गया है। आलम यह है कि एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) समेत तमाम जीवनरक्षक दवाएं अस्पताल में खत्म हो गई हैं। इसे लेकर मरीजों की दिक्कत बढ़ गई है। मंगलवार को एआरवी लगवाने पहुंचे मरीजों ने वैक्सीन नहीं मिलने पर हंगामा किया।
दरअसल, गर्मियों के मौसम में आवारा जानवरों के हमला करने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। श्वान और बंदर के हमलों में इजाफा होने से लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उनको निराश होकर लौटना पड़ रहा है। आलम यह है कि लोगों को प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाओं की खरीद करनी पड़ रही है। इसके साथ बीपी, सर्दी, जुकाम और बुखार की दवाओं का भी टोटा है। मरीज दवाओं के लिए भटक रहे हैं।
मंगलवार को जब मरीज वैक्सीन लेने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने वैक्सीन कक्ष का ताला बंद देख आक्रोश जताया। वहीं गेट पर एक बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था कि कुत्ता काटे के इंजेक्शन समाप्त हो गए हैं। फर्म द्वारा आपूर्ति होने पर लगाए जाएंगे। मरीजों का कहना था कि जिला अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहा है। एआरवी के पिछले कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आजतक आपूर्ति नहीं हो सकी है। मांग करने वालों में आशीष यादव, संदीप, विजय, रितु, संध्या समेत तमाम मरीज मौजूद रहे।
बाहर से मंगाई थी दवाएं
पिछले दिनों जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा पडने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने बाहरी मेडिकल स्टोर से दवाओं की खरीद की थी। इससे साफ है कि जिला अस्पताल रामभरोसे चल रहा है।
इसलिए नहीं हो रही आपूर्ति
जिला अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति का प्रमुख कारण बकाया है। पिछले सालों में क्रय की गई दवाओं का आपूर्तिकर्ता कंपनियों को अब तक भुगतान नहीं हुआ है। इसके चलते कंपनियों ने आपूर्ति ठप कर दी है।