आगरा। एमजी रोड के दोनों की ओर दीवारों पर हुई पेंटिंग में नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) की ओर से भेजे गए 15 करोड़ के बिल के मामले में लीपापोती हो गई है।
अधिकारी अब इसे लिपिकीय त्रुटि बता रहे हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि अफसरों ने बिना पढ़े कवरिंग लेटर पर दस्तखत कैसे कर दिए। यदि लेटर को पढ़ लिया जाता तो फजीहत नहीं होती।
एमजी रोड पर पर हुई पेटिंग का व्यय राशि विकास प्राधिकरण करनी अदा करनी थी। व्यय राशि का बिल डूडा ने जिलाधिकारी को भेजा था। जिलाधिकारी के माध्यम से ही कवरिंग लेटर बनाकर विकास प्र्राधिकरण को भेजना था।
जिलाधिकारी कार्यालय से कवरिंग लेटर में व्यय हुई धनराशि 1500,750,00.00 दर्शायी गई है। यहां लिपिक ने शासकीय नियमों का पालन नहीं किया।
नियम में यह स्पष्ट है कि जब कभी कोई राशि अंकों में लिखी जाती है तो कोष्ठक में इस राशि को शब्दों में लिखा जाता है लेकिन यहां राशि केवल अंकों में लिखी हुई थी। हैरत की बात यह है कि जिलाधिकारी गौरव दयाल ने भी पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
अब वह कह रहे हैं कि यह लिपकीय त्रुटि थी जिसे तुरंत ठीक करा दिया गया था। फर भी इस मामले में गलती करने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आखिर 15 लाख कहां खर्च हुए
डूडा ने कहा कि बिल 15 करोड़ का नहीं, बल्कि 15 लाख का था। सवाल यह है कि 15 लाख भी कहां खर्च किए गए। सारा काम तो समाजसेवी संस्थाओं ने किया।
पेंटिंग स्कूल के बच्चों ने की, रंग भी साथ लाए। फिर यह 15 लाख कहां लगाए गए। संस्थाओं को यह बताया भी नहीं गया था कि डूडा इस काम में शासन को बिल भेजेगा।