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सत्संग के माध्यम से सरल बनाया जा सकता है जीवन

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फिरोजाबाद। अखिल भारतीय सोह्म महामंडल शाखा के तत्वावधान आयोजित भागवत कथा व विराट संत सम्मेलन में दूसरे दिन श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी। व्यास पीठ से महापुरुषों ने अमृत वर्षा की, पूरा पंडाल जयकारों से गूंजता रहा।
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सोह्म पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति का अति राग किसी के लिए द्वेष बन जाता है। इसका बदला द्वेष से मिलता है। जिसके मन में द्वेष है, उसके मन में नित्य जलन रहती है। द्वेष जीवन का लक्ष्य बन जाता है। नई-नई अशांति पैदा करते हैं।

हमें इनसे बचकर अपने इस अमूल्य जीवन का लाभ उठाते हुए परमात्मा को प्राप्त करना चाहिए। स्वामी शिवचेतन महाराज ने कहा कि त्याग की भावना रखने वाले मनुष्य के जीवन में संपन्नता आती है, जबकि समभाव की कमी से गृहक्लेश समेत तमाम विपदाएं जन्म लेती हैं। सत्संग के माध्यम से जीवन को सरल बनाया जा सकता है। प्रभु की श्रद्धा से भक्ति करने वाला कभी दुखी नहीं रहता।
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स्वामी शुक देवानंद ने कहा कि जिस व्यक्ति का मन मलिन होता है, वहां भगवान का वास नहीं होता। जिनका मन निर्मल होता है, वही व्यक्ति भगवान को प्राप्त कर लेता है। स्वामी ज्ञानदंन ने कहा कि हर व्यक्ति को अपना तेज अर्थात आवेश अपने आप ही संभालना चाहिए। स्वामी अनंतानंद, स्वामी निगमानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी रामानंद, स्वामी प्रीतमदास ने धर्मसभा को संबोधित किया। रविवार को भागवत कथा में भगवान बाबन अवतार के जन्म की कथा का श्रवण होगा।
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