फिरोजाबाद। जिले में मानक विहीन स्कूल वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जो मासूमों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। सड़क पर डग्गामार टेंपो और वैन मनमाने ढंग से बच्चों को बिठाकर ले जाते देखे जाते हैं। सबसे बड़ा खतरा स्कूल वैन में लगी गैस किट बन रही है।
जिले में एलपीजी वितरण के लिए पंप नहीं है, लेकिन सड़क बड़ी संख्या में मानकविहीन वाहन एलपीजी किट लगे वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। कई बार वाहनों में अवैध रूप से गैस रिफलिंग करते हुए हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक और परिवहन विभाग के अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। स्कूलों से संबद्ध वैनों में भूसे की तरह बच्चों को बिठाकर जीवन खतरे में डाला जा रहा है। अफसर ओवरलोडिंग पर ध्यान नहीं देते हैं।
क्या हैं स्कूल वाहन के मानक
-स्कूल वाहन का रंग सुनहरा पीला हो, उसपर दोनों ओर और बीच में चार इंच मोटी नीले रंग की पट्टी हो।
-स्कूल बस में आगे-पीछे दरवाजों के अतिरिक्त दो इमरजेंसी गेट हों।
-सीटों के नीचे बैग रखने की व्यवस्था हो।
-बसों व वाहनों में स्पीड अलार्म लगा हो जिससे स्कूल संचालक को वाहन की गति का पता चल सके।
-एलपीजी वाहन में अग्निशमन संयंत्र की व्यवस्था हो।
-पांच साल के अनुभव वाले चालकों से ही स्कूल वाहन परिचालन की अनिवार्यता।
-स्कूल वाहन में फर्स्ट-एड बाक्स की व्यवस्था हो।
जिले में हुए स्कूल वाहन हादसों पर एक नजर
- 13 सितंबर 2017। थाना नसीरपुर के गांव टीकाराम में स्कूल बस पर हाइटेंशन तार गिर गया था। बच्चों को जल्द उतारा, लेकिन चालक झुलस गया था।
-10 अप्रैल 2017। एका में अनियंत्रित स्कूल बस ने बाइक सवार छात्र को रौंद दिया था।
- 10 मार्च 2017। नारखी क्षेत्र में अनियंत्रित स्कूल बस पलट गई थी। छह बच्चे घायल हो गए थे।