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व्यापार नहीं तैयार, असमंजस में व्यापारी-खरीदार

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gst - फोटो : pti
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मैनपुरी। जीएसटी लागू होने के पहले दिन सुबह से लेकर शाम तक दुकानदार से लेकर खरीदार तक असमंजस में रहे। हालांकि कुछ एक दुकानदारों ने नए प्रकार की बिल बुक छपवाकर पहले दिन उसी पर बिल काटे। नए प्रकार के बिल को देखने के लिए खरीदारों में भी उत्सुकता दिखी। हालांकि व्यापारी बिना तैयारी के जीएसटी लागू करने पर काफी आक्रोशित दिखे।
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केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार शनिवार से जिले में भी जीएसटी लागू हो गया। शनिवार सुबह से ही व्यापारियों में बेचैनी रही। उनको यही बता नहीं था कि वे आज से किस आधार पर और किस प्रकार बिल काटें। यही नहीं बिल किस तरह से काटें इसकी भी जानकारी अधिकांश दुकानदारों को नहीं थी। हालांकि कुछ एक दुकानदारों ने विभाग से जानकारी कर बिल भी छपवा लिए थे। ऐसे ही एक दुकानदार एनएमबी मिष्ठान भंडार के मालिक रज्जन ने बताया कि जीएसटी के लिए उन्होंने पहले ही जानकारी कर अलग से बिल बुक छपवा ली थी। शनिवार सुबह से वे इसी पर बिल काटकर ग्राहकों को दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हालांकि प्रतिदिन का रिकार्ड आन लाइन दर्ज करने में काफी मुश्किल आएगी। कारण अभी इसके लिए कंप्यूटर खरीदना पड़ा है। वहीं साफ्टवेयर अभी मिला नहीं है। हालांकि अपनी तरफ से बिल बुक के आधार पर कंप्यूटर में रिकार्ड रखना शुरू कर दिया। उनके यहां कंप्यूटर पर डाटा फीड कर रहे क्षितिज ने बताया कि हालांकि जीएसटी में बहुत कुछ अलग नहीं है सिवाय इसके कि आपको प्रतिदिन की बिक्री और खरीद का रिकार्ड आन लाइन करना पड़ेगा। आम दुकानदारों के लिए ऐसा करना काफी अजीब और मुश्किल भरा हो सकता है। वहीं दवा की दुकान करने वाले अमित ने बताया कि जीएसटी काफी फायदेमंद है। हालांकि इसको लागू करने के लिए अभी मूलभूत सुविधाएं नहीं है। इसमें थोड़ा समय लगेगा।
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एक खरीदार बलवीर सिंह ने बताया कि उन्हें सुबह से ही जीएसटी का बिल देखने की उत्सुकता थी। कई दुकानों पर गए लेकिन सभी ने मना कर दिया। अंत में एक दुकान पर बिल देखा। पूर्व में मिलने वाले बिलों से यह काफी अलग है। इसमें टैक्स का विवरण बिल्कुल स्पष्ट तरीके से है। कोई भी इसे समझ सकता है।
वहीं अधिकांश दुकानदारों में शनिवार को भी जीएसटी को लेकर गुस्सा दिखा। कारण उन्हें न तो इसके बारे में कोई जानकारी थी और न ही किसी अधिकारी ने ही उन्हें कुछ बताया था। उनका कहना था कि इसके लिए अधिकारियों को पहले व्यापारियों को प्रशिक्षण और तैयारियों के लिए समय दिया जाना चाहिए था।
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