फिरोजाबाद। देश में एक जुलाई से लागू होने वाली जीएसटी में कांच आइटमों पर टैक्स बढ़ने से उद्यमियों की बेचैनी बढ़ गई है। उद्यमियों ने प्रस्तावित रेट कम करने के लिए कोशिशें तेज कर दीं हैं।
सुहागनगर का कांच उद्योग देश-विदेश में विख्यात है। माउथ ब्लोइंग के जरिए बनने वाली कांच की बोतल, ग्लास, चिमनी, बल्ब व अन्य आइटमों की यूपी के साथ देश-विदेश में व्यापक पैमाने पर बिक्री होती है। टैक्स रेट कम होने से उद्योग जगत को अभी तक राहत मिल रही थी। उद्यमियों का कहना है कि माउथ ब्लोइंग के आइटमों पर अब तक दो प्रतिशत एक्साइज और पांच प्रतिशत वैट लगता था।
केंद्र सरकार ने प्रस्तावित जीएसटी में माउथ ब्लोइंग आइटमों पर 18 प्रतिशत टैक्स प्रस्तावित कर किया है, जो बहुत अधिक है। कांच की चिमनी पर मात्र दो प्रतिशत एक्साइज लगता था, जिसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत, एलईडी बल्ब, कांच बल्ब पर 18 से 28 प्रतिशत तक टैक्स की रेट बढ़ाने की तैयारी है।
बिजली के बिल का बोझ कम करने के लिए उपभोक्ता भले ही एलईडी बल्ब और सीएफएल का अधिक प्रयोग हो रहा है, लेकिन अधिकतर गांवों में आज भी बड़े स्तर कांच के बल्ब और चिमनी की बिक्री होती है। उद्यमी की टैक्स रेट बढ़ने से असर पड़ने की आशंका जता रहे हैं।
जीएसटी की प्रस्तावित रेट कम करने को लेकर उद्यमियों ने डीएम नेहा शर्मा का पत्र भेजा है। यूपीजीएमएस, ग्लास इंपोर्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन व माडर्न ग्लास इंडस्ट्रीज ने पत्र भेजा था। डीएम ने आयुक्त वाणिज्य कर भेजे पत्र में कहा है कि उद्योग हित में माउथ ब्लोइंग ग्लास वेयर पर 18 प्रतिशत के स्थान पर चार प्रतिशत तथा एलईडी लाइट व कांच के बल्ब पर 28 प्रतिशत को कम करने पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करें।
एक जुलाई से जीएसटी लागू करने पर ग्लास वेयर, माउथ ब्लोइंग ग्लास की रेट बढ़ जाएगी। वर्तमान में बिक्री कम हो रही है, जीएसटी में रेट बढ़ने से सेल में और गिरावट आएगी। केंद्र सरकार को टैक्स की रेट कम करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, जिससे कांच उद्योग प्रभावित न हो।
राजकुमार मित्तल,डायरेक्टर-यूपीजीएमएस
जीएसटी में प्रस्तावित रेट काफी अधिक रखी गई हैं। हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि माउथ ब्लोइंग, कांच के बल्ब की रेट कम की जाए। सामान की खरीद महंगी होने से आइटमों की रेट काफी बढ़ जाएंगी, जिससे कांच उद्योग काफी प्रभावित हो जाएगा।
संजय अग्रवाल - कारखाना संचालक
जीएसटी को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है लेकिन जो टैक्स स्लैब सामने आया है उसका कांच उद्योग पर अभी से असर दिख रहा है। बाहर के आर्डर मिलना बंद हो गए हैं। उत्पादन लागत बढ़ने से सीधा असर बाजार पर पडेगा। कांच उद्योग लघु उद्योग से जुड़ा है इसका ध्यान रखा जाए।
उद्यमी अभिषेक मित्तल चंचल