ताजमहल पर रविवार को 50 हजार से ज्यादा देसी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ उमड़ी। दोपहर तक पश्चिमी और पूर्वी गेटों की टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारें लगी रहीं। उमस भरी गर्मी में पर्यटक ताज में प्रवेश करने के लिए घंटों तक इंतजार करते रहे। कई बच्चों और महिलाओं की हालत बिगड़ गई, वे बेहोश हो गए।
एलटी ग्रेड शिक्षक परीक्षा में भाग लेने आए अभ्यर्थी भी शाम को पहुंचे थे। वीकेंड पर सुबह से ही पर्यटकों की भीड़ का पहुंचना शुरू हो गया। दिल्ली, हरियाणा से काफी संख्या में पर्यटक ताजमहल पर पहुंचे। दोपहर दो बजे के बाद पर्यटकों की भारी तादाद के कारण टिकट खिड़कियों पर लंबी लाइनें लगी रहीं। टिकट के लिए मारामारी मची रही। पर्यटकों ने किसी तरह टिकट हासिल किया तो स्मारक में प्रवेश के लिए लंबी लाइन लगी हुई थीं।
ताजमहल परिसर में भी पर्यटकों के कारण मुख्य गुंबद से सेंट्रल टैंक तक लाइन थी। इस दौरान कई पर्यटकों के मोबाइल गायब हो गए। पर्यटकों की गाड़ियां पश्चिमी गेट पार्किंग भर जाने के बाद आगरा किला रोड और पुरानी मंडी तक खड़ी कराई गईं। शाम को प्रतियोगी परीक्षा देकर लौटे अभ्यर्थियों की भीड़ भी ताजमहल पहुंच गईं। इस कारण सूर्यास्त तक ताज पर सैलानियों की संख्या में कमी नहीं आ सकी।
एएसआई के सूत्रों के मुताबिक टिकट खिड़कियों से 40 हजार से ज्यादा टिकटों की बिक्री की गई। ऑनलाइन विक्रय टिकटों की संख्या इसमें शामिल नहीं है। चार हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटकों समेत 50 हजार से ज्यादा पर्यटकों ने ताज निहारा।
गर्मी से बेहोश हुए बच्चे
कई घंटे तक लाइन में लगने के बाद भी सैकड़ों पर्यटकों को टिकट नहीं मिल सका। गर्मी में लाइन में लगने के कारण कई महिलाओं और बच्चों की हालत बिगड़ गई। कुछ बच्चे तो बेहोश हो गए। परिवारीजन उन्हें पानी छिड़ककर होश में लाए। ताजमहल के अंदर भी उमस से विदेशी पर्यटक बेहाल नजर आए। कई पर्यटक तो पेड़ों के नीचे सुस्ताते नजर आए।
इतना सा इंतजाम नहीं कर सकते
किसे नहीं मालूम है कि वीकेंड पर ताज पर ज्यादा सैलानी आते हैं। क्या दो दिन के लिए टिकट की अतिरिक्त खिड़की नहीं खोली जा सकती है? इसी तरह चेकिंग के लिए और मशीनों का इंतजाम नहीं हो सकता है क्या? दूर- दूर से आने वाले सैलानी धक्के खाते हैं, बेहोश होते हैं तो क्या छवि बनती है शहर की?