मैनपुरी। सरकारी योजनाओं के तहत बैंकों द्वारा बांटा गया ऋण उनके लिए मुसीबत बन गया है। लाख कोशिशों के बाद भी ऋण की धनराशि ग्राहकों द्वारा जमा नहीं कराई जा रही है। ऐसे में 50 हजार से अधिक खाते एनपीए हो गए हैं। बैंकों ने इन खाताधारकों को नोटिस जारी कर ऋण जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
बैंकों द्वारा रोजगार के लिए अलग-अलग योजनाओं में ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, खादी ग्रामोद्योग के तहत हुए ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड प्रमुख हैं। इन योजनाओं के तहत बैंकों ने करीब 70 हजार लोगों को 500 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया। इसमें से 52381 ग्राहकों ने ऋण लौटाया ही नहीं। इन लोगों पर कुल 386.85 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। लाख कोशिशों के बाद भी ये खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) हो गए। ऐसे में बैंक परेशान हैं कि आखिर इन खातों में ऋण की धनराशि कैसे जमा कराई जाए। इसके लिए सभी ग्राहकों को नोटिस जारी कर उन्हें एक माह में ऋण की किस्त जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। वहीं बैंकों ने नोटिस के बाद भी ऋण वापस न करने वालों की आरसी जारी करने का निर्णय लिया है। आरसी जारी होने के बाद वसूली की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होगी।
ऐसे एनपीए होते हैं खाते
कोई भी खाता कब एनपीए होगा ये खाते के प्रकार पर निर्भर करता है। जानकारों के अनुसार प्रतिमाह जिस खाते की किस्त जमा की जाती है अगर उसमें तीन माह तक किस्त जमा न की जाए तो खाता एनपीए हो जाता है। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड व किसान संबंधी अन्य योजनाओं का खाता फसल के बाद भी धनराशि जमा न करने पर छह माह में एनपीए होता है।
हाईलाइटर्स
-70 हजार कुल खाताधारकों को दिया गया ऋण
-52381 खाते हो गए एनपीए
-386 करोड़ रुपये की है बकाएदारी
-01 माह बाद जारी की जाएगी आरसी
बैंकों को अगर समय से ऋण लौटाया जाए तो एक ओर जहां ब्याज कम पड़ता है तो वहीं ग्राहक को बैंक दोबारा ऋण देने में भी संकोच नहीं करती है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ऋण के खाते एनपीए होने से बैंकों की परेशानी बढ़ गई है।
जोगिंद्र पाल, अग्रणी जिला प्रबंधक।