बेशकीमती सरकारी जमीन पर थी 47 साल से नजर
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कमला नगर, घटवासन की बेशकीमती सरकारी जमीन पर भूमाफिया की चार दशक पहले से नजर थी। तहसील स्तर से लगातार पत्राचार के बावजूद रजिस्ट्री विभाग ने इसे नजरअंदाज किया। इसी का परिणाम रहा कि बेखौफ भूमाफिया ने 180 करोड़ की जमीन बेच डाली। अधिकारी जांच के आदेशों को दबाते रहे।
घटवासन में 14 हजार वर्गमीटर से अधिक शासकीय जमीन है। तहसील के रिकॉर्ड में यह नगर निगम के नाम दर्ज है। भूमाफिया ने इस पर 47 साल पहले नजर गढ़ा दी थी। तहसील रिकार्ड के मुताबिक, वर्ष 1970 में गणेशी पुत्र ननुआ ने इस पर कब्जा कर लिया था। सालों तक यह जमीन ऐसे ही पड़ी रही। किसी ने सुध नहीं ली। बाद में बड़ी मुश्किल से इसे कब्जा मुक्त कराया जा सका था।
वर्ष 2009 में बाबूलाल ने इस जमीन पर अपना दावा किया। तहसील ने हाथ खडे़ कर दिए। तत्कालीन कमिश्नर ने उनके पक्ष में आदेश कर दिया। लेकिन तहसील कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपना रुख नहीं बदला। वह लगातार इसे शासकीय जमीन बताते रहे। इसके लिए तहसील से निबंधन विभाग को जांच के लिए पूर्व में कई पत्र लिखे गए लेकिन जांच की बजाए निबंधन अधिकारियों ने इन्हें कूडे़ के ढेर में डाल दिया। इसी का नतीजा रहा कि सरकार की बेशकीमती जमीन के भूमाफिया ने बैनामा कर दिए।
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अरिदमन सिंह ने खुलवाई थीं फाइलें
निबंधन विभाग में स्टांप घोटाले सालों से चल रहे हैं। पूर्व स्टांप एवं पंजीयन शुल्क मंत्री अरिदमन सिंह ने दो साल पूर्व बैनामों में स्टांप घोटाले का मामला उठाया था। शासन स्तर से जांच बैठाई गई। कमिश्नर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसमें 30 करोड के स्टांप घोटाले सामने आए थे। तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व रामआसरे और उदयीराम को दोषी पाया गया। मगर, इन दोनों पर अब तक शिकंजा नहीं कस पाया है। पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह का कहना है कि इस मामले की यदि उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो और भी कई अधिकारियों के चेहरे बेनकाब होंगे।
हाईकोर्ट में अपील करेगा निगम
आगरा। नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस मामले में एसडीएम कोर्ट में मुकदमा हुआ था। उसके बाद मामला कमिश्नर कोर्ट और फिर राजस्व परिषद तक पहुंचा है। नगर निगम इस जमीन को लेकर चुप नहीं बैठने वाला है। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार इस प्रकरण की हाईकोर्ट में अपील जा रही है।