मथुरा। सोलह वर्ष पूर्व की गई हत्या के मामले में दो सगे भाइयों सहित तीन को एडीजे द्वितीय की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है । युवक की हत्या मामूली सी बात पर कर दी गई थी। न्यायाधीश ने तीनों अभियुक्तों को मंगलवार को जेल भेजा है ।
वारदात 26 जून 2003 की है । छाता के तरौली जनूवी निवासी सत्तो के पुत्र संजय को गांव के ही रहने वाले चेतराम उर्फ होकड़, राजू पुत्रगण परमल ठाकुर अपने साथी तेजा पुत्र बिजेन्द्र अपने साथ ले गए। अगले दिन चेतराम अन्य लोगों के साथ घर आया तथा बताया कि उनका बेटा संजय खेत में स्थित नलकूप का पटा काट रहा था। इसलिए उन्होंने उसको लाठी डंडों से मारा है तथा उसके हाथ पैर बांध कर वारी पर ही डाल दिया है ।
28 जून की सुबह सत्तो अपनी पत्नी अनार देवी तथा पुत्र राजू के साथ जब आठ बजे खेत पर गए तो वहां देखा कि उनके लड़के संजय का शव खेत की नाली में बोरे में बंद पड़ा हुआ था । खेत पर खून से सनी रस्सी आदि सामान भी मिला । इसी दिन पिता ने छाता कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी।
इस मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे द्वितीय के न्यायाधीश डा. बब्बू सारंग ने अभियुक्त चेतराम उर्फ होकड़, उसके भाई राजू तथा गांव के ही तेजा को आजीवन कारावास तथा दस-दस वर्ष की सजा सुनाई है। तीनों अभियुक्तों को मंगलवार को अदालत ने जेल भेजा है । एडीजीसी गोवर्धन सिंह यादव ने बताया कि कोर्ट ने एससीएसटी के मामले में अभियुक्तों को बरी कर दिया। हत्या तथा अन्य मामले में सजा सुनाई है ।