एटा। आठ महीने बीत गए, अब तीन महीने ही बचे हैं। समय सीमा समाप्त होने को है, लेकिन प्रदेश सरकार का गांवों को गरीबी मुक्त करने का सपना अभी सपना ही है। हम बात कर रहे हैं प्रदेश सरकार के मिशन अंत्योदय की। गांवों को अंत्योदय करने के सरकार के इस मिशन को जिले के हाकिमों ने अमलीजामा पहनाने में अब तक कुछ खास काम नहीं किया है। आलम यह है कि गांवों में न तो विकास ही हुआ न ही कोई ऐसा काम जिससे गरीबी दूर हो सके। खुले में शौच मुक्त करने का दावा भी कितना खोखला है यह सभी देख ही चुके हैं। मिशन अंत्योदय पर पानी फिरता देख अब ग्रामीणों की आस टूट रही है। पढ़िए रिपोर्ट...
निर्देशों को धता बताते रहे विभाग
योजना के तहत जिले के 40 विभागों को गांवों में अपनी योजनाओं के जरिए विकास कार्य कराने का जिम्मा सौंपा गया था। इसे लेकर लगातार विभागों को कार्ययोजना देने और विकास कार्य कराने के लिए निर्देशित किया जाता रहा। मगर किसी भी विभाग ने इस पर अमल नहीं किया। हाल ही में छह दिसंबर को हुई बैठक में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया, लेकिन विभागों ने इसे भी नकार दिया।
मार्च 2019 तक का मिला लक्ष्य
जिले में मिशन अंत्योदय के तहत पहले चरण में 105 गांवों को मार्च 2019 तक गरीबी मुक्त किया जाना है। योजना को शुरू हुए 08 महीने का वक्त हो चला है, लेकिन कवायद अभी भी सुस्त पड़ी है। प्रशासन के पास अब महज तीन महीने का वक्त शेष है, ऐसे में योजना का परवान चढना असंभव लगता है।े
64 गांव हुए कुपोषण मुक्त
जिले में गांवों को कुपोषण मुक्त करने की योजना की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। जिले में अब तक महज 64 गांव कुपोषण मुक्त करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। आलम यह है कि गांव में कुपोषण को लेकर कवायदें सुस्त पड़ी हैं।
कहते हैं आंकड़े
105 गांवों को किया जाना था गरीबी से मुक्त
2019 मार्च तक की तय की गई है सीमा
64 गांव हो चुके हैं कुपोषण मुक्त
100 गांवों को किया जाना है कुपोषण से मुक्त
मशन अंत्योदय को लेकर काम चल रहा है। विभाग अपने-अपने स्तर से गांवों में कार्य करा रहे हैं। मार्च 2019 तक जिले के 105 गांवों को गरीबी मुक्त किया जाएगा।
एसएन सिंह कुशवाह, डीडीओ, नोडल अधिकारी, मिशन अंत्योदय