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नेशनल कमीशन बिल के विरोध में हड़ताल पर रहे डॉक्टर

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नेशनल कमीशन बिल के विरोध में हड़ताल पर रहे डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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एटा। नेशनल कमीशन बिल के विरोध में शनिवार को जिले भर के चिकित्सक हड़ताल पर रहे। सुबह प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम वित्त को भी सौंपा गया। चिकित्सक नेशनल कमीशन बिल के रुल्स में बंधना नहीं चाहते हैं।
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इंडियन मेडीकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजेश सक्सेना के नेतृत्व में शनिवार को एक बैठक कचहरी रोड क्लीनिक पर आयोजित की गई। जिसमें नेशनल कमीशन बिल के नियमों में चिकित्सकों को बांधने को लेकर आपत्ति जताई गई और चिकित्सकों की देश व्यापी हड़ताल में शामिल रहे। डॉ. राजेश सक्सेना ने कहा कि नेशनल कमीशन बिल अलोकतांत्रिक, गरीबों के विरुद्ध, संघीय व समाज विरोधी, अमीरों को रास आने वाला है। इस बिल के माध्यम से सरकार का समस्त अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का इरादा है। सरकार अगर मांगों पर विचार नहीं करती है तो चिकित्सकों को अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए विवश होना पड़ेगा। इसके पश्चात चिकित्सकों का एक दल कलक्ट्रेट पहुंचा और एडीएम वित्त महेश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. स्वतंत्र शर्मा, सचिव आशुतोष गुप्ता, मुकुल जौहरी पीआरओ, डॉ. हरीश गुप्ता, डॉ. निर्मल जैन, डॉ. शैलेन्द्र जैन, डॉ. जयप्रकाश सक्सैना, डॉ. रतन वर्मा, डॉ. पीके मित्तल आदि मौजूद रहे।
गंभीर मरीजों को ही देखा गया
बिल के विरोध में जिले के चिकित्सक हड़ताल रहे तो सामान्य मरीजों का उपचार भी नहीं किया। गंभीर मरीजों को ही चिकित्सकों ने हड़ताल के दौरान अपनी सेवाएं दी। हड़ताल का स्वरूप भी थोड़ा नाजुक बनाया गया चिकित्सक अपने क्लीनिक पर तो बैठे मगर मरीजों से दूरी बनाकर रखी।
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कासगंज। निजी क्षेत्र के चिकित्सकों ने सरकार द्वारा लाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल रखकर धिक्कार दिवस मनाया गया। हड़ताल के चलते मरीजों को काफी दिक्कत हो गई। चिकित्सकों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार माहेश्वरी ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। इस बिल के माध्यम से सरकार समस्त अधिकार केंद्रीयकृत करने का इरादा रखती है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। सरकार ने राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से हांशिए पर कर दिया है। सरकार ने इसमें 3 की जगह 10 सदस्यों के समूहबद्ध किए जाने की सिफारिश को भी अस्वीकार कर दिया। जिससे 10 वर्ष तक राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। इस बिल के लागू होने से गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए काफी दिक्कतें होंगी। जिससे वे संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद के साथ पंजीकृत नहीं हो पाएंगे। यदि सरकार यह बिल पास करती है तो आईएमए देश व्यापी प्रर्दशन के लिए बाध्य होगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
इस दौरान डॉ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, डॉ. अजय गोविल, डॉ. अखिलेश गौड़, डॉ. मृदुल जाजू, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. प्रवेश माहेश्वरी, डॉ. अनिल सेठ, डॉ. के गुप्ता, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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