एटा। पल-पल हादसे का डर और मौत का खौफ। पता नहीं कब इमारत गिर जाए और सब कुछ खत्म। लेकिन न तो जिम्मेदारों को परवाह और न ही इमारत के रखवालों को चिंता। जिले में जर्जर इमारतों को लेकर प्रशासन बेखबर है। बारिश शुरू हो चुकी है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
शहर में गिरासू इमारतों की देखरेख को लेकर उदासीनता बड़े हादसे को न्यौता दे रही है। भवनों का हाल यह हो चला है कि आए दिन ईंट-पत्थर गिरते रहते हैं, लेकिन इस सब के बावजूद भी अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। हादसों पर गौर करें तो पिछले दिनों बारिश के दौरान आगरा, गाजियाबाद और नोएडा में बिल्डिंग धराशाई हो गई थीं, फिर भी जिला प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठा है।
जिले के राजकीय इंटर कॉलेज में बने सरकारी आवासों में आए दिन मलबा टूटकर गिरता रहता है। मैनगंज में भी आधा दर्जन पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। यहां लोगों को बारिश के दिनों में तो हादसा होने का खासा डर बना रहता है। इसके अलावा घंटाघर की गुंबदें भी जर्जर हैं। आए दिन मलबा गिरता रहता है। पहले एक-दो लोग चुटैल भी हुए हैं। जिले के चकबंदी कार्यालय, सहायक निदेशक मत्स्य कार्यालय, मनोरंजन विभाग के अलावा जिला अस्पताल परिसर, पुलिस लाइन एवं कोतवाली देहात परिसर में बनीं आवासीय इमारतों की भी हालत ठीक नहीं हैं। पुराने जीआईसी भवन को भी धराशाई होने का इंतजार है। सौ साल से अधिक पुरानी इमारत के हॉल की आधी छत गिर चुकी है। पिछले दिनों जिला प्रशासन ने संबंधित भवन स्वामियों को इन भवनों को ढहाने के निर्देश दिए थे।
एसडीएम भी दे चुके हैं निर्देश
नगर के सुभाष मूर्ति स्थित जर्जर भवन को लेकर पिछले दिनों एसडीएम और ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने कार्रवाई की थी। उन्होंने भवन के स्वामियों और किराएदार को भवन को तुड़वाकर पुर्ननिर्माण कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई कवायद नहीं हुई।
जर्जर भवनों को लेकर पालिका और पंचायतों से सूची तलब की गई है। बरसात को देखते हुए भवनों को लेकर व्यापक प्रबंध किए जाएंगे।
महेंद्र सिंह तंवर, एसडीएम, एटा।