मथुरा। इस वक्त कुत्ता और बंदर का काटना खतरनाक ही नहीं महंगा भी साबित हो सकता है। जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इसके चलते 100-150 मरीज प्रत्येक दिन वापस लौट रहे हैं। ऐसे में मरीजों को इन महंगे इंजेक्शन की बाजार से खरीद करनी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में ही प्रत्येक दिन 100-150 मरीज प्रतिदिन कुत्ता और बंदरों से काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इसमें 20 प्रतिशत मरीज बंदरों से प्रभावित होते हैं, जबकि बाकी 80 प्रतिशत मरीज कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। बाजार में महंगी कीमत वाले ये इंजेक्शन जिला अस्पताल सहित ग्रामीण अंचलों के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाए जाते हैं। ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में इनकी उपलब्धता कम होने के कारण अधिक दबाव जिला अस्पताल पर ही रहता है।
पिछले दो दिन से जिला अस्पताल में भी एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इससे इंजेक्शन के लिए यहां पहुंचने वाले मरीज निराश लौट रहे हैं। यहां लोगों को बाजार का रास्ता दिखाया जा रहा है। हालांकि बाजार से खरीदकर इंजेक्शन लाने वालों को जिला अस्पताल में सिर्फ लगाया जा रहा है। यहां .5 एमएल वाले इंजेक्शन को मिलकर दो मरीज लगवा रहे हैं।
एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इसकी सूचना आपूर्ति करने वाली एजेंसी को दे दी गई है, लेकिन अब तक उपलब्धता संभव नहीं हो सकी है। इस स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
डॉ. वीके गुप्ता, सीएमएस, महर्षि दयानंद जिला अस्पताल