वृंदावन (मथुरा)। यमुना रक्षक दल के तत्वावधान में कैमारवन स्थित गोविंद मठ पर विभिन्न मुद्दों पर रविवार को एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें यमुना, पर्यावरण, शिक्षा, सुरक्षा के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक समरसता पर वक्ताओं ने विचार रखे।
साथ ही सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यमुना जल को लेकर 1994 में हुए समझौते को रद्द कर नए सिरे से लागू करने की मांग की। कहा कि यदि केंद्र सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक शील मधुर ने कहा कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक समरसता के बल पर ही भारत विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो सकता है। यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकिशन दास ने कहा कि 1994 में पांच राज्यों के बीच हुआ जल बंटवारा समझौता नए सिरे से लागू करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यमुना के मिटते अस्तित्व को बचाने के लिए सभी राज्यों को एक साथ मिलकर यमुना शुद्धिकरण की दिशा में प्रयास करने होंगे। फरीदाबाद के प्रथम महापौर सूबेदार सुमन ने भी विचार रखे। पं. उदयन शर्मा व श्रीदास प्रजापति ने कहा कि यमुना की अविरल धारा के लिए ब्रजवासी पूरी तरह से एकजुट हैं।
प्रो. आरएन सिंह, आचार्य बद्रीश, यशपाल चौधरी, साध्वी गीता, सौरभ गौड़, जगदंबा सिंह, श्यामसुंदर तिवारी, जीतेंद्र तिवारी, अवधेश सिंह, सोहनलाल आचार्य, माधव चौहान, विष्णु शर्मा, प्रताप चौधरी उपस्थित थे।