राधाकुंड (मथुरा)। गांव बसोंती के निकट शनिवार की रात आगरा कैनाल (नहर) की पटरी टूटने से हाल ही में बोई गई सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। किसानों में सिंचाई विभाग के खिलाफ आक्रोश है। पीड़ित किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर डीएम से मुआवजे की मांग की है।
पीड़ित किसानों का कहना था कि उन्होंने उधार रुपये लेकर बीज तथा खाद खरीदा था और अपने खेतों की बुवाई की थी। अभी गेहूं के बीज में कल्ले निकल रहे थे कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब फिर से कर्ज लेकर खेत बोने पड़ेंगे। यदि सिंचाई विभाग के अधिकारी पटरियों को दुरुस्त करा कर पानी छोड़ता तो यह हादसा नहीं होता। सैकड़ों बीघा जमीन, जिसमें गेहूं बुवाई की जा चुकी थी नहर की पटरी टूट जाने के कारण खेतों में सैकड़ों बीगों में बोई हुई गेहूं की फसल पूरे तरीके से पानी में डूब गई।
पीड़ित किसान माधवदास, मोनी, सौदान सिंह ग्राम प्रधान, बॉबी, गोरखी, दीनदयाल, नंदन, अर्जुन, भारती, देवी सिंह, लोकपाल आदि ने कहा है कि वे पूरी तरह चौपट हो गए हैं। कुछ समय पूर्व सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नहर की पटरी से कुलाबे आदि जेसीबी से खोदवाए थे। इससे पटरी कमजोर हो गई, जिसे ठीक नहीं कराया गया। पीड़ित किसानों ने डीएम से मुआवजे की मांग की है।
सिंचाई विभाग के गोवर्धन क्षेत्र के जेई नाहर सिंह ने बताया कि आगरा कैनाल से अवैध कुलाबे निकालने का कार्य चल रहा है। जेसीबी से कुलाबे निकालने के चलते बसौंती के निकट पटरी कमजोर हो गई थी, जिससे पानी खेतों में घुस गया। पटरी को ठीक करा दिया गया है।